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किसान लुट चुके तब खुली सरकार की नींद : मोदी

8 वर्ष पहले
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पटना. पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने आरोप लगाया है कि धान की खरीद करने के लिए पैक्सों और राज्य खाद्य निगम के जरिए क्रय केन्द्र खोलने और बोनस की घोषणा करने में विलंब के कारण अफरा-तफरी की स्थिति है। देरी के कारण मजबूरन दो तिहाई किसानों को औने-पौने दाम पर बिचौलियों के माध्यम से धान बेचना पड़ा। जिन छोटे और मंझोले किसानों ने अपना लाखों टन धान बेच दिया है, सरकार बताएं कि उन किसानों को हुए अरबों के घाटे की क्षति-पूर्ति वह कैसे करेगी? दरअसल, जब किसान लुट चुके हैं, तब जाकर सरकार की नींद खुली है।

पहले होती बोनस की घोषणा, तो न बेचते धान

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रति क्विंटल धान पर 300 रुपए बोनस पांच साल के लिए देने का एलान अपने चुनावी घोषणा पत्र में कर दिया था। राज्यपाल के अभिभाषण में भी इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया। बजट में इसके लिए 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहां के किसानों को पहले से ही मालूम है कि उन्हें प्रति क्विंटल धान पर 300 रुपए अतिरिक्त मिलेगा। बिहार में भी अगर 15 नवंबर, 2013 के पहले ही बोनस की घोषणा कर दी जाती है, तो किसान औने-पौने दाम पर बिचौलियों को अपना धान नहीं बेचते। छत्तीसगढ़ में मिलों के लिए धान की कुटाई दर प्रति क्विंटल 40 रुपए तय है, जबकि बिहार में मात्र 25 रुपए निर्धारित है।