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जीविका के माध्यम से राज्य के डेढ़ करोड़ परिवारों की बढ़ेगी आय

7 वर्ष पहले
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पटना. जीविका के माध्यम से राज्य के डेढ़ करोड़ परिवारों की आय बढ़ाने का लक्ष्य है। प्रत्येक परिवार को कम से कम एक लाख रुपये प्रतिवर्ष आय हो। गुरुवार को द्वितीय बिहार नवाचार फोरम के ज्ञान समारोह में विश्व बैंक के प्रतिनिधि परमेश शाह ने कहा कि इनोवेशन (नवाचार) के माध्यम से विकास संभव है। विश्व बैंक गांवों के विकास में हर संभव मदद करेगा।

जीविका के अध्यक्ष सह विकास आयुक्त आलोक कुमार सिन्हा ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि जीविका द्वारा ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए सहायता दी जा रही है। वहीं, योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव व नवाचार परिषद के सदस्य सचिव विजय प्रकाश ने कहा कि बिहार इनोवेशन की भूमि है। बिहार में ही प्रथम गणतंत्र स्थापित हुआ। शून्य से लेकर अनेक गणितीय सूत्रों की खोज हुई। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में नवाचार का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अमृत लाल मीणा ने कहा कि देशव्यापी इनोवेशन को चिह्नित कर राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक कार्यक्रमों में इसका उपयोग किया जाएगा, ताकि हर परिवार की आय कम से कम एक लाख रुपए हो सके। जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अरविंद चौधरी ने कहा कि देश के विभिन्न भागों में 11 बड़े नगरों में आयोजित रोड शो में लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और ऑनलाइन आवेदन से साफ है कि नवाचारों में काफी उत्साह है। मौके पर संतोष मैथ्यू व आरवी दिलीप भी थे।डाबर खरीदेगा शहद, एसआरएसएल दिलाएगा रोजगार

जीविका के निदेशक

कुमार अंशुमाली ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उत्पादित शहद क्रडाबरञ्ज खरीदेगी। इसके लिए जीविका और डाबर के बीच एमओयू साइन किया गया है। शहद उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक में डाबर मदद करेगी। टेक्सटाइल कंपनी श्री राजस्थान सिंटेक्स लिमिटेड (एसआरएसएल) और जीविका के बीच एमओयू साइन किया गया है। प्रतिवर्ष राज्य के तीन हजार युवकों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिलाएगा।