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  • सबसे अधिक मुखर रहे नीतीश खेमे के मंत्री श्याम रजक।

कैबिनेट की बैठक में नीतीश और मांझी खेमे के मंत्रियों के बीच आ गई थी हाथा-पाई की नौबत

6 वर्ष पहले
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पटना. मुख्यमंत्री आवास में हुई कैबिनेट की बैठक में नीतीश और मांझी खेमे के मंत्रियों के बीच हाथा-पाई की नौबत आ गई। एक-दूसरे के लिए अलंकारिक शब्दों का जमकर प्रयोग हुआ। सबसे अधिक मुखर रहे नीतीश खेमे के मंत्री श्याम रजक।
चार लिखित प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पूछा कि क्या किसी को कुछ और भी प्रस्ताव पेश करना है? इस पर राज्यपाल के अभिभाषण के प्रारूप को मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने का प्रस्ताव आया।
यह प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री ने फिर से पूछा कि क्या कोई और भी प्रस्ताव है? तीन बार यही बात पूछने पर मुख्यमंत्री ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने राज्य के ताजा राजनीतिक हालात का हवाला देकर विधानसभा भंग करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने का प्रस्ताव रखा।
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री को उचित समय पर उचित निर्णय करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। यह सुनते ही नीतीश के करीबी मंत्री श्याम रजक उठ खड़े हुए और नरेंद्र को मांझी का एजेंट बताने लगे। फिर उठकर नरेंद्र के पास पहुंच गए। उन्हें आक्रामक देख कर नरेंद्र भी उठ खड़े हुए। पूरी घटना मुख्यमंत्री के सामने हुई। किसी ने भी उनकी मौजूदगी का ख्याल नहीं रखा। इसी दौरान नीतीश खेमे के मंत्रियों ने मुख्य सचिव के स्थान पर बैठक में मौजूद विकास आयुक्त एस.के. नेगी पर दबाव डाला कि कैबिनेट की बैठक में उनके द्वारा किए गए विरोध को भी प्रोसिंडिंग में सामिल किया जाना चाहिए।
विधानसभा भंग करने की सिफारिश के लिए मुख्यमंत्री अधिकृत
असहमति के स्वर के बीच राज्य कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने के लिए अधिकृत कर दिया है। शनिवार को 1 अणे मार्ग में हुई कैबिनेट की बैठक में चार प्रस्ताव पास करने बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने विधानसभा भंग करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने का प्रस्ताव पेश किया। इस पर नीतीश खेमे के 19 मंत्री एक साथ उठ खड़े हुए और प्रस्ताव का विरोध कर दिया।
मुख्यमंत्री के पक्ष में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह, शिक्षा मंत्री वृशिन पटेल, पीएचईडी मंत्री महाचंद्र प्रसाद, नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, संस्कृति मंत्री विनय बिहारी, आईटी मंत्री शाहीद अली खान और उद्योग मंत्री भीम सिंह पक्ष में थे। इसी के बाद नीतीश समर्थक मंत्री शोर-शराबा करते बैठक छोड़ कर बाहर चले आए। कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव बी. प्रधान ने बताया कि कैबिनेट ने विधान सभा भंग करने की अनुशंसा के प्रस्ताव पर उचित समय पर उचित निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया।
कक्षपालों पर मेहरबान हुई सरकार
सत्ता पर संकट के बावजूद सरकार ने राज्य की जेलों में तैनात कक्षपालों का ख्याल रखा है। कक्षपालों के वर्दी भत्ता में 1400 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है। शनिवार को कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव बी. प्रधान ने बताया कि कैबिनेट ने विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के प्रारूप को अनुमोदन करने के लिए भी मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में श्रेणी-1 की 411 किलोमीटर की 19 सड़कों के रखरखाव के लिए 168 करोड़ रुपए दिए गए हैं। बांका में खेसर तारापुर से जिलानी पथ की मरम्मत के लिए 7 करोड़ रुपए दिए गए हैं। कैबिनेट ने बख्तियारपुर की तत्कालीन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी इंदु कुमारी को बर्खास्त कर दिया है।