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गलती मिल की, सूद देगी एसएफसी

8 वर्ष पहले
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पटना. राइस मिलों द्वारा चावल पचा जाने का खामियाजा राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) को भुगतना पड़ रहा है। बैंक से कर्ज लेकर एसएफसी ने पैक्स को धान की कीमत अदा की। दो वर्षों में एसएफसी को बैंक में सूद के रूप में लगभग 150 करोड़ भुगतान करना होगा।

एसएफसी बैंकों से 13 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर रुपए लेता है। राज्य सरकार द्वारा ब्याज पर दो प्रतिशत सब्सिडी मिलने पर 11 प्रतिशत की दर से बैंक को कर्ज लौटाना होता है। 2011-12 में 430 करोड़ का लगभग दो वर्ष का ब्याज 50 करोड़ और 2011-12 में लगभग एक वर्ष का सूद 100 करोड़ होता है।

समय पर चावल नहीं लौटाने वाले राइस मिल से अब राशि वसूलने की कोशिश हो रही है। रोहतास में 72.78 करोड़ रुपए बकाया हैं। यहां 78 राइस मिल पर सर्टिफिकेट केस किया गया है, जबकि 12 पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मधुबनी में पांच मिलों पर 8 करोड़ रुपए बकाया है।

सीबीआई जांच की मांग
बिहार राइस मिलर्स एसोसिएशन चावल नहीं लौटाने के मामले में पूरी तरह राइस मिल मालिकों को दोषी ठहराने को अन्याय बता रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राम कुमार झा ने कहा कि पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। धान देने के लिए मिलर के साथ अनुबंध काफी देर से किया गया। धान देने में भी देर हुई है। मिलर द्वारा तैयार लगभग एक लाख टन चावल एफसीआई ने रिजेक्ट कर दिया है। इसका घाटा मिलर को उठाना पड़ रहा है।

राइस मिल की शिकायत
चावल शत-प्रतिशत जमा करने के बाद भी मिलिंग चार्ज, परिवहन शुल्क एवं हथालन चार्ज का भुगतान नहीं किया है।
सुझाव 80 प्रतिशत चावल जमा करने वाले राइस मिल मालिकों पर किया गया मुकदमा वापस लें चावल राशि जमा करने का स्पष्ट आदेश जारी हो, जिला प्रबंधक 1903 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मांग रहे

2012-13 की समस्या
चावल 31 दिसंबर तक जमा होना मुमकिन नहीं था
देर से अनुबंध हुआ और धान भी देर से दिया गया
भीगे धान को उठाने के लिए प्रशासन ने दबाव बनाया