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पानी के जहाज से लेकर तय किया माउंट एवरेस्ट का सफरनामा, किया कारनामा!

एवरेस्ट पर चढऩे वाले पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के इस अधिकारी के नाम से यह रिकार्ड जुड़ गया।

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2013, 12:00 AM IST
Sikkim Cadre IAS Ravindra Kumar Sikkim Cadre IAS Ravindra Kumar
पटना/बेगूसराय। अगर कोई यह जानना चाहे कि माउंट एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कौन हैं, तो उसका जवाब क्या होगा? इसका जवाब है बिहार के बेगूसराय के रहने वाले और सिक्किम कैडर के आईएएस रविंद्र कुमार। कुमार ने 2011 में आईएएस के लिए चुने गये और उसके अगले साल उन्होंने सिक्किम में काम शुरू किया। मन में चाह थी कि बिहार कैडर मिले, पर ऐसा हो न सका। 19 मई को माउंट एवरेस्ट पर चढऩे वाले पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा के इस अधिकारी के नाम से यह रिकार्ड जुड़ गया।
dainikbhaskar.com से बात करते हुए रविंद्र कुमार ने कहा: 8848 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर जो पहली बात मन में कौंधी, वह थी कि बाउंड्रीलेस धरती पर इंसान ने अपने-अपने हिस्से की सीमाएं खींच ली हैं। यह अजीब लगता है जब आप चोटी से दुनिया के बारे में सोचते हैं। चोटी के नीचे सीमाओं के अंदर ही हमने अपनी दुनिया बना ली गयी है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें कैसे की तैयारी, साथ में जानें पनिया के जहाज से पहाड़ तक के सफरनामें के बारे में....
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कैसे की तैयारी
 
काठमांडु से माउंट एवरेस्ट पर चढऩे का सफर छह अप्रैल को शुरू हुआ था। बेस कैंप से चोटी तक पहुंचने में दस दिनों का वक्त लगता है। रास्ते में चार कैंप हैं। लेकिन इसके काफी पहले से माउंट एवरेस्ट पर चढऩे की तैयारी शुरू हो गयी थी। दार्जिलिंग में एक इंस्टीट्यूट से 28-28 दिनों का कोर्स पूरा किया था। उसके बाद हर दिन कम से कम चार घंटे तक ट्रैकिंग की प्रैक्टिस की। गंगटोक में घर के सामने ही तीन मंजिला बिल्डिंब है। हर दिन उस पर चढऩा और उतरना होता था। लगातार छह महीने तक इसकी प्रैक्टिस की। गंगटोक के एसपी मनोज तिवारी इस दौरान लगातार साथ रहे। उनका साथ और हौसला दोनां मिलता रहा।
 
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पनिया के जहाज से पहाड़ तक का सफर
 
रविंद्र कुमार ने दसवीं बेगूसराय के जवाहर नवोदय से पास की थी। रांची में डीएवी से 12 वीं करने के बाद वह मर्चेंट नेवी की पढ़ाई करने मुंबई चले गये। उसके ठीक पहले आईआईटी में चयन हुआ था। लेकिन अच्छा फैकेल्टी न मिलने की वजह से उसमें उन्होंने जाना बेहतर नहीं समझा। मर्चेंट नेवी की पढ़ाई के बाद एक इटालियन कंपनी में नौकरी लग गयी। छह साल तक वहां रहे। एडवेंचर्स रविंद्र कुमार ने इस दौरान ब्लैक बेल्ट और तैराकी में भी हाथ आजमाया और अपनी पहचान बनायी।
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डेढ़ सौ कविताएं लिख डाली
 
रविंद्र कुमार के पिता शिवनंदन प्रसाद सिंह किसान हैं। छह भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर रविंद्र कुमार ने स्कूल के दिनों में ही कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। करीब डेढ़ सौ कविताएं लिख डालीं। हालांकि वह किताब की शक्ल में अब तक नहीं आ पायी है। गरीबी और भ्रष्टाचार इनकी कविताओं के थीम हैं। वह अपने मामा जो डीआईजी के पद से रिटायर हुए, से काफी प्रभावित रहे। बेहद करीब से उन्होंने गरीबी देखी है।
 
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बिहार में काम करने की चाह
 
रविंद्र कुमार बिहार में काम करने की ख्वाहिश रखते हैं। वह चाहते हैं कि बिहार की तरक्की में वह भी अपनी भूमिका अदा करें। खास तौर से डिजास्टर मैनेमेंट को लेकर जो काम हो रहे हैं, उसमें वह अपनी भागीदारी चाहते हैं।
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