(ललित बाबू का फाइल फोटो)
नई दिल्ली/पटना. पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या के मामले में 40 साल बाद फैसला आया है। दिल्ली की एक कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया है। उन्हें 15 दिसंबर को फांसी या उम्रकैद की सजा सुनाई जा सकती है। केस में 22 जजों ने अभियोजन पक्ष के 161 और बचाव पक्ष के 40 गवाहों को सुना। मिश्रा के भाई और बेटे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि देश के शीर्ष नेता की हत्या के मामले में निचली अदालत का फैसला 40 साल बाद आना न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
इस केस ने समस्तीपुर से पटना और फिर दिल्ली का सफर तो चार साल में तय कर लिया था। लेकिन फैसला इतनी जल्दी नहीं आ पाया। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद 2012 में प्रतिदिन सुनवाई हुई। इंदिरा सरकार में रेलमंत्री रहे मिश्रा 2 जनवरी 1975 को समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर ब्रॉडगेज लाइन का उदघाटन करने समस्तीपुर गए थे। वहां बम विस्फोट में घायल हुए थे। अगले दिन दानापुर रेलवे अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।
इन्हें ठहराया कसूरवार
कड़कड़डूमा कोर्ट के जिला जज विनोद गोयल ने चारों आरोपियों गोपाल जी, रंजन द्विवेदी, संतोषानंद अवधूत और सुदेवानंद अवधूत को दोषी ठहराया। आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत। एक आरोपी की मौत हो चुकी है। ऊपरी अदालतों में अपील करेंगे दोषी | चारों दोषी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। उन्हें हिरासत में लेने के निर्देश दिए गए हैं। चारों दोषी इस फैसले को चुनौती देंगे। यानी सजा में और देरी हो सकती है।
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