पटना. मैनपुरा में अपराधियों ने स्कूली बच्चों के सामने ही इलाके के दबंग व हत्या के आरोपी संतोष सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। गुरुवार सुबह सवा ग्यारह बजे चार बाइक पर सवार आठ हथियारबंद अपराधियों ने मैनपुरा राजकीय मध्य विद्यालय के सामने ही संतोष (35) पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। 9 एमएम की पिस्टल से कुल आठ गोलियां चलाई गई थीं। संतोष को छह गोलियां लगीं।
इसके बाद अपराधी बम फेंकते हुए निकल भागे। ये सारी घटना स्कूल में मौजूद बच्चों के सामने हुई। बाद में इलाज के दौरान पीएमसीएच में संतोष की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार हत्या का कारण आधार कार्ड की दलाली है। इसके अलावा इलाके में वर्चस्व को लेकर उसकी शंकर राय से भी दुश्मनी थी।
गैंगवार की डर से रैफ के जवान तैनात: घटना के वक्त संतोष स्कूल में चल रहे आधार केंद्र से निकल रहा था। बाहर आते ही अपराधी बाइक से पहुंचे व गोलियां चला दीं। घटना के बाद गैंगवार के डर से इलाके में पुलिस और रैफ के जवान तैनात कर दिए गए।
बिरजू हत्याकांड का आरोपी था संतोष : संतोष अपराधी से बालू व्यवसायी बने बिरजू हत्याकांड का आरोपी था। एक साल पहले ही जेल से छूटकर बाहर आया था। संतोष के चाचा अखिलेश सिंह के बयान पर तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
खून के बदले खून का खेल
मैनपुरा अब बदलापुर बनने की कगार पर खड़ा है। बदले की आग में अब तक चार मर्डर इस इलाके में हो चुके हैं। मैनपुरा में बिरजू और संतोष दो गिरोह चलते थे। कभी बिरजू के साथी रहे शंकर राय, विक्की को संतोष ने धीरे-धीरे अपने साथ मिला लिया। वजह यह थी कि बिरजू ने सबके सामने संतोष के गाल पर थप्पड़ जड़ दिया था। इस थप्पड़ के कारण बिरजू और संतोष के गैंग आमने-सामने आ गए थे। दोनों गैंग के विवाद में पहली हत्या बोरिंग रोड में मोतिहारी के विनय कुमार की हुई थी। जो बिरजू का करीबी बन गया था। ऐसा कहा जाता है कि उसकी हत्या बिरजू को संदेश देने के लिए थी।
विनय ने एक अनोखा गैंग बिरजू के लिए बनाया था। जो फेसबुक के जरिए संचालित होता था। विनय की हत्या के बाद संतोष ने बिरजू के करीबी शंकर राय, विक्की को अपने साथ मिलाकर जुलाई 2012 में बिरजू की हत्या करवा कर थप्पड़ का बदला लिया था। शंकर राय, विक्की सहित अन्य साथियों ने संतोष का उस समय साथ दिया था। फिर दुजरा के चवनियां की अचानक हत्या हुई। माना गया कि बिरजू की हत्या का बदला चवनियां को मार कर लिया गया। इधर, बिरजू की हत्या के आरोप में संतोष, शंकर, विक्की सहित अन्य लोग जेल चले गए। बाद में छूटे। बाहर आने के बाद इनके बीच रुपयों का विवाद हुआ। जांच बताती है कि महावीर स्टोर का मालिक मनोज साह, जिसकी दुकान पर चार नकाबपोशों ने 82 हजार रुपए लूटे थे। वह दोनों गिरोह की अवैध कमाई अपने पास रखता था।