(दुर्गा पूजा को लेकर पटना सिटी के मच्छरहटा मंडी में अशोक राजपथ पर हो रही सजावट।)
पटना. गर्दनीबाग के सरिस्ताबाद में श्री श्री दुर्गापूजा समिति नवयुवक संघ की ओर से इस बार अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह का पंडाल बनाया जा रहा है। इसकी लंबाई 125 फीट, चौड़ाई 70 और ऊंचाई 90 फीट होगी। इसके मुख्य निर्माता का नाम राजू है। इसमें 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मूर्ति निर्माता जगन्नाथ पाल प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। यहां एलईडी लाइट से 60 फीट के टावर का निर्माण भी कराया जा रहा है। बच्चों के लिए खास कार्टून तैयार कराया जा रहा है। पटना आर्ट कॉलेज के विद्यार्थी थर्मोकोल से पंडाल को सजा रहे हैं।
खास क्या
60 फीट का टावर एलईडी से बनेगा।
500 फीट लाइट से सड़क के दोनों तरफ सजाया जाएगा।
महिला एवं पुरुष के लिए अलग-अलग द्वार बनाए जाएंगे।
सप्तमी को हलुआ का भोग लगेगा।
नवमी को खिचड़ी एवं दो हजार लोगों का भंडारा होगा।
मिथिला एवं वाराणसी पंचांग को मिलाकर पूजा होगी
पटना|श्री श्री 108 दुर्गापूजा समिति, राजीवनगर रोड नंबर-24 स्थित शिवमंदिर में मिथिला एवं वाराणसी पंचांग को मिलाकर पूजा की जाती है। 60 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा एवं 40 फीट ऊंचा बनने वाले इस पंडाल में महिषासुर मर्दनी की विशाल प्रतिमा के साथ सरस्वती, कार्तिक, गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके अलावा देवी पुराण के अनुसार नव पत्रिका देवी (मान, अनार, धान, कच्चू, केला, अशोक, बेल, हल्दी एवं अपराजिता को मिलाकर) की सप्तमी को विशेष प्रतिमा का निर्माण किया जाता है। पंडाल का निर्माण जानेमाने मूर्तिकार अशोक कर रहे हैं।
खास क्या
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए (महिला-पुरुष) अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाया गया है। सप्तमी को महाप्रसाद में हलवा, अष्टमी को खीर एवं नवमी को खिचड़ी का वितरण किया जाएगा। हवन के बाद प्रतिवर्ष 51 कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने व दक्षिणा देने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। खास कर अष्टमी की रात में होने वाली पूजा को देखने के लिए दूर-दूर से भक्तजन यहां आते है। आरती के बाद प्रतिदिन ढोल-नगाड़ों के साथ माता के नामों का होने वाले जयकारे में भाग लेकर भक्तजन आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं।
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