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चारा घोटाले में नीतीश-शिवानंद और लालू के मामले में हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

7 वर्ष पहले
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पटना. चारा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिवानंद तिवारी की भूमिका की सीबीआई जांच के लिए दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। मिथिलेश कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रारंभिक जांच में नीतीश व शिवानंद के नाम भी सामने आए थे लेकिन सीबीआई ने इनकी जांच नहीं की।
वहीं चारा घोटाले में लालू प्रसाद की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। लालू ने मांग की है कि उन्हें एक मामले आरसी बीस में सजा हुई है, इसलिए इसी तरह के आरसी 64 केस में उनके विरुद्ध सुनवाई गलत है। हालांकि सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि आरसी 64 केस आरसी बीस मामले से एकदम अलग है। इसके गवाह अलग हैं, इसके आरोपी अलग हैं, मामला भी अलग है। इसके लिए सीबीआई पुख्ता सुबूत देगा। कोर्ट ने सीबीआई को दस्तावेज देने का निर्देश दिया और फैसला सुरक्षित रख लिया।
डॉ. मिश्र की जमानत अवधि बढ़ी
झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र की जमानत अवधि पंद्रह अक्टूबर तक बढ़ा दी। कोर्ट ने उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर जमानत दी थी। इसी आधार पर उनकी जमानत अवधि बढ़ाई गई है। उधर, नीतीश-शिवानंद के खिलाफ याचिका दायर करने वाले ने बताया कि जिस 164 के बयान पर लालू प्रसाद समेत अन्य नेताओं के मामले में केस दर्ज हुआ और बाद में उनलोगों को सजा मिली।
उसी मामले में नीतीश कुमार, शिवानंद तिवारी समेत कई लोगों के नाम आए थे पर सीबीआई ने इनके विरुद्ध जांच नहीं की। वहीं सीबीआई के वकील मोख्तार खान ने कहा कि सभी के विरुद्ध जांच की गई थी। लेकिन जिनके विरुद्ध ठोस सुबूत नहीं मिले उन्हें मामले से अलग कर दिया गया। इसी आधार पर नीतीश कुमार व शिवानंद तिवारी के मामले में जांच नहीं की गई।