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बिहार में वित्त का प्रबंध सुधरा, स्कूल का बिगड़ा

8 वर्ष पहले
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पटना. विकसित राज्यों को पीछे छोड़कर बिहार वित्तीय प्रबंधन के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पहले स्थान पर भी पिछड़े राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2013-14 के वित्तीय प्रबंधन के आधार पर यह आंकड़ा जारी किया है। आरबीआई की रिपोर्ट विकास कार्यों पर खर्च, सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च और पूंजीगत खर्च के मानकों पर तैयार की गई है।

विकास कार्यों पर खर्च
20.7'
छत्तीसगढ़
13.8
बिहार
15.7
एमपी
14.7
झारखंड
सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च
14.0
छत्तीसगढ़
11.3
बिहार
9.7'
एमपी
9.2
झारखंड

पूंजीगत खर्च

इस मोर्चे पर खर्च के मामले में जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में छत्तीसगढ़ गोवा के बाद दूसरे स्थान पर है। छत्तीसगढ़ में पूंजीगत व्यय का 4.2' है, जबकि सभी राज्यों का औसत छत्तीसगढ़ का लगभग आधा (2.5') है।

हमारे स्कूलों से गायब रहते हैं 37 बच्चे और 19 शिक्षक

बिहार के प्राइमरी स्कूलों में करीब 37 फीसदी बच्चे गैर हाजिर रहते हैं। अपर प्राइमरी में तो और बुरा हाल है। 40 फीसदी बच्चे स्कूल से गायब रहते हैं। इन्हें स्कूल आने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है, लेकिन प्राइमरी के 19 फीसदी और अपर प्राइमरी के २२ फीसदी टीचर्स भी क्लास में नहीं मिलते। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी को बुलाई गई सचिवों की बैठक के लिए तैयार एजेंडे में इन आंकड़ों का जिक्र है। ताजा आंकड़े वर्ष 2012-13 के सर्वे पर आधारित हैं।

अन्य राज्यों से धुंधली तस्वीर
राज्य शिक्षक उपस्थिति
2007-2013
बिहार -- 81.0

दो लाख शिक्षकों के पद खाली

बिहार में शिक्षकों के पद भी बड़ी संख्या में खाली रहने की चिंता बैठक में नजर आएगी। सूबे में दो लाख से ज्यादा स्कूली शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें से एक लाख 66 हजार से ज्यादा पद सर्व शिक्षा अभियान से संबंधित हैं। बिहार में अपर प्राइमरी वर्ष 2006-07 के मुकाबले प्रगति हुई है।