नई दिल्ली. इंदिरा आवास के मामले में बिहार सरकार लिखा-पढ़ी कर नाहक समय बर्बाद कर रही है। केंद्र सरकार इस मद में राज्य का कोटा बढ़ाने नहीं जा रही है। वजह कुछ खास नहीं है।
नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी लोगों को 2022 तक घर देने का वादा किया है। इसलिए वह इस योजना का नाम बदलने जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्री बीरेन्द्र सिंह ने गुरुवार को लोकसभा में इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि सबको घर देने के लिए इंदिरा आवास योजना का नाम बदलकर ‘‘राष्ट्रीय ग्रामीण आवास मिशन’’ रखा जाएगा। धीरे-धीरे इंदिरा आवास योजना की पूरी राशि इसी योजना में चली जाएगी। केंद्र का तर्क होगा-जब सबको आवास दिया ही जा रहा है तो इसी काम के लिए अलग से योजना क्यों? पिछले वर्ष बिहार को 6.06 लाख आवास बनाने का कोटा दिया गया था। चालू वित्तीय वर्ष में यह घटकर 2.80 लाख हो गया। कुल 54 फीसदी की कटौती हुई।
बहरहाल, इंदिरा आवास योजना में कटौती को लेकर बिहार और केंद्र सरकार के बीच खूब लिखा पढ़ी हुई। सीएम जीतन राम मांझी ने पीएम तक को पत्र लिखा। कोटा बढ़ाने की बात तो दूर पीएमओ से उनके पत्र का जवाब भी नहीं आया। केंद्र की चुप्पी का साफ संकेत यही है कि बिहार को इंदिरा आवास मामले में एक आवास भी अधिक नहीं मिलेगा। पहले राज्य सरकार को लगा कि गणना में तकनीकी गड़़बड़ी के चलते ऐसा हुआ।
मगर, अब राज्य सरकार भी मान बैठी है कि अधिक नहीं मिलेगा। हां, राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी चलती रहेगी। असल में केंद्र ने आवास आवंटन की पुरानी गाइडलाइन में ही बदलाव कर दिया। पहले कच्चा मकान वालों को भी इसके दायरे में रखा गया था। अब इस श्रेणी के लोग दायरे से बाहर हैं। सिर्फ इसी प्रावधान के हट जाने से इतनी बड़ी कटौती हो गई।
गाइडलाइन में होता रहा है बदलाव
इंदिरा आवास की योजना का लाभ सबसे पहले अनुसूचित जाति एवं जनजाति आबादी को दिया गया। फिर इसमें बीपीएल परिवारों को जोड़ा गया। बाद में कच्चा मकान वालों को भी योजना में शामिल किया गया। केंद्र का तर्क है कि 2011 के जनगणना के फार्मेट में कच्चा मकान वाला कॉलम नहीं था। इसलिए इंदिरा आवास योजना में भी इस कॉलम को खत्म कर दिया गया। हालांकि, बिहार सहित कुछ अन्य राज्यों के आग्रह पर जनगणना महानिदेशक को पत्र लिखा गया। दिशा निर्देश मांगा गया । अब तक कोई निर्देश नहीं मिला।
केंद्र सरकार को हमने पत्र लिखा था। लेकिन, कोटा बढ़ाने के बारे में कोई आश्वासन नहीं है। आवास आवंटन में कटौती से गरीबों को भारी नुकसान हुआ है। -नीतीश मिश्रा, ग्रामीण विकास मंत्री, बिहार