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डाउनलोड करेंपटना. बल्ब से लेकर ब्रीफकेस तक, सात अनियमितताओं की दो साल से अटकी जांच में अब शुरू होगी। 31 जनवरी को निगम पदाधिकारी के साथ ऑडिट की टीम बैठक होगी। नगर आयुक्त कुलदीप नारायण ने नगर निगम व्यवस्था में सुधार और ऑडिट में पूछे गए स्पष्टीकरण का जवाब देने के लिए निगम एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के साथ संबंधित पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।
अगर बैठक में ऑडिट की टीम द्वारा उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनियमितता के दोषी पदाधिकारी कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि ऑडिट टीम द्वारा वितीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 के लेखा के जांच के क्रम में कई आपत्तियां दर्ज की गई थी। इसमें ईधन, भाड़े की गाड़ी, दैनिक मजदूरों पर किए गए खर्च, प्रमंडलों द्वारा किए गए व्यय एवं भवनों का नक्शा पारित करने, सैरातों की बंदोबस्ती आदि पर ऑडिट की टीम ने सवाल उठाया था।
वो 7 मामले जिनपर अफसरों से किया जाएगा जवाब-तलब
निगम के 72 वार्डों में 50-50 लगाना सीएफएल बल्ब के हिसाब से कुल 3600 सीएफएल बल्ब लगाने के लिए 73.80 लाख का भुगतान किया गया। जांच रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि कई स्थलों पर बगैर सीएफएल लगाए या पुराने लगाए लाइटों को नया दिखा दिया गया।
पार्षदों की ब्रीफकेस की खरीद के लिए 3.51 लाख रुपया खर्च कर दिया गया, जबकि बिहार नगरपालिका अधिनियम इस तरह के खर्च के लिए कोई बजट का प्रावधान नहीं था।
110 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 23 शौचालय हैं। निगम कार्यालय को शौचालयों के निर्माण के लिए 43675634 रुपये का अनुदान मिला। लेकिन इस राशि को खर्च नहीं किया गया।
आवंटियों को कम एरिया दिखा कर तीन दुकानों का आवंटन किया गया। इसके वजह से निगम कोष को 24.34 लाख की हानि हुई है।
ट्रैक्टरों में सेल्फ, डायनेमो एवं बैट्री पर 10.76 लाख खर्च किया जाता तो कम से कम 198 लीटर डीजल बचता। इससे 85.26 लाख रुपया खर्च होने से बचाया जा सकता था।
निगम एजेंसियों से विज्ञापन लगाने के एवज में पैसा वसूलने में फिसड्डी है। मार्च 2013 तक विज्ञापन एजेंसियों पर 14.05 लाख रुपये का बकाया है।
नगर निगम वाणिज्यिक उपयोग पर लगने वाले सेवा करों की वसूली किरायेदारों से नहीं कर सका। सेवा कर की वसूली नहीं होने के कारण 72.56 लाख रुपये निगम कोष में नहीं आ सका। इन सभी मामलों में ऑडिट टीम को अनियमितता ही नहीं घपले की आशंका है।
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