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विवादों से पुराना नाता रहा है राज्यपाल का, दलबदलूओं को दिया था मान्यता

6 वर्ष पहले
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पटना। बिहार में पल-पल बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच राज्‍यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी की भूमिका काफी अहम हो गई है। जदयू ने मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी को पार्टी से निष्‍कासित कर दिया है और नीतीश कुमार को अपना नया नेता चुन लिया है।
हालांकि मांझी अभी भी दावा कह रहे हैं कि शरद यादव को उन्‍हें विधायक दल के नेता पद से हटाने और पार्टी से हटाने का कोई अधिकार नहीं है। मांझी का कहना है कि उन्‍हें भाजपा का समर्थन प्राप्‍त है और उनकी सरकार बहुमत में है। दूसरी ओर नीतीश कुमार, राजद प्रमुख लालू प्रसाद, कांग्रेस नेता सदानंद सिंह राज्यपाल से मिलकर अपना दावा पेश किया है।

अब यह मामला राज्यपाल के पास है। राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को यह तय करना है कि प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाएंगे? या फिर नीतीश को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे? बिहार विधानसभा भंग करेंगे? बहरहाल इस मामले पर राज्यपाल दिल्ली से आने के बाद फैसला लेंगे।
विवादों से रहा है नाता
केशरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक अतीत का नाता विवादों का रहा है। बात 19 अक्‍टूबर, 1997 की है, जब मायावती ने यूपी में तत्‍कालीन कल्‍याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।तत्‍कालीन राज्‍यपाल रोमेश भंडारी ने दो दिनों के भीतर कल्‍याण सरकार को बहुमत साबित करने को कहा। बस 48 घंटों में यूपी का सियासी नक्‍शा पूरी तरह बदल गया। बसपा, कांग्रेस और जनता दल के कई विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया।
21 अक्‍टूबर को यूपी विधानसभा में विधायकों के बीच माइकों से मारपीट, लात घूंसे और जूते-चप्‍पल चले। उस समय विधानसभा के अध्‍यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी ही थे। दिलचस्‍प बात यह है कि केशरीनाथ त्रिपाठी ने सभी दलबदलूओं को मान्‍यता दे दी। इस फैसले की कड़ी आलोचना हुई थी।