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अररिया व जमुई बने राजद-लोजपा की फांस

8 वर्ष पहले
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पटना. दो लोकसभा सीटों अररिया और जमुई के कारण राजद और लोजपा में अनबन है। अररिया सीट राजद को चाहिए, तो जमुई सीट लोजपा को। गठबंधन के तौर पर पिछले लोकसभा चुनाव में अररिया लोजपा और जमुई राजद के पास था। पर, इस बार लोजपा को अररिया के साथ जमुई भी चाहिए। लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान की इच्छा अपने 'चिराग पासवान को जमुई से लड़ाने की है। लेकिन, मामला इसलिए फंस गया है कि राजद के मो. तस्लीमुद्दीन ने अररिया पर अपना दावा ठोक दिया है।

सीमांचल इलाके में मो. तस्लीमुद्दीन का ऐसा कद है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद भी फिलहाल उनकी इच्छा के खिलाफ जाने की स्थिति में नहीं हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में जमुई में राजद के बैनर तले श्याम रजक 1.78 लाख वोट लेकर दूसरे स्थान पर थे। वे जदयू के भूदेव चौधरी से 30 हजार मतों से हारे थे। वहीं, अररिया में लोजपा के जाकिर हुसैन खान की भाजपा के प्रदीप सिंह से 22 हजार वोटों से हार हुई थी। राजद दोनों में से एक सीट चाहता है।
लोजपा ने पूछा- हीना को टिकट, तो वीणा को क्यों नहीं

राजद के नेताओं को लोजपा के रणनीतिकारों ने टका-सा जवाब दिया है कि सजा पाए राजद के शहाबुद्दीन की पत्नी हीना शहाब सीवान से चुनाव लड़ सकती हैं, तो लोजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूरजभान की पत्नी वीणा देवी के चुनाव लडऩे पर दबे जुबान से ही सही आपत्ति क्यों जताई जा रही है। राजद का यह दोहरा मापदंड इस बार नहीं चलने देंगे। इसका जवाब राजद ने रामा सिंह के आरा सीट मामले में दिया है।

आरा सीट से भाजपा की तरफ से डैसिंग आईएएस आरके सिंह का नाम आगे आने के बाद राजद का कहना है कि रामा सिंह आरके सिंह को टक्कर नहीं दे सकते हैं। ऐसे में लोजपा को आरा सीट से दावेदारी छोड़ देनी चाहिए। उसके एवज में राजद दूसरी सीट देने पर विचार कर सकता है। लेकिन, लोजपा अपने इन दोनों महत्वपूर्ण नेताओं पर किसी भी तरह का रिस्क लेने को तैयार नहीं है। ऐसे में राजद नेताओं का कहना है कि दबाव की रणनीति के तहत लोजपा अपनी बात मनवाने के लिए ही राजद-लोजपा गठबंधन पर इधर ज्यादा ही सवाल उठाने लगा है।

सिद्दिकी को सता रहा सीट जाने का भय

राजद, लोजपा और कांग्रेस की होने वाली संभावित गठबंधन के उहापोह के बीच राजद नेताओं को अपनी सीट खोने का डर सताने लगा है। विधानसभा में राजद के नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी का कहना है कि उनकी सीट मधुबनी सहयोगी दल को गई, तो वे आहत होंगे। पिछली बार चुनाव लडऩे की इच्छा नहीं होने के बावजूद लालू प्रसाद जी के कहने पर वहां से चुनाव लड़े और काफी कम मतों से दूसरे नंबर पर रहे। पिछले पांच वर्षो से क्षेत्र से सीधा जुड़ाव बनाए हुए हैं। ऐसे में लोगों की भी इच्छा है कि राजद उन्हें चुनाव लड़ाए। वहीं, खगडिय़ा से चुनाव लडऩे का मन बना चुके विधायक सम्राट चौधरी का कहना है कि वे गठबंधन और उसके बाद होने वाले सीट समझौते का अभी इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद फैसला लेंगे। हालांकि, उनकी भी मंशा खगडिय़ा से ही चुनाव लडऩे की है।

नीतीश कुमार कभी नहीं सेकुलर हो सकते

नीतीश शासन के आठ सालों में पासवान समाज उनके टारगेट पर था। पासवान को महादलित से अलग कर सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया गया। इसकी लड़ाई राजद ने भी लड़ी है। दूसरी बात है कि नीतीश सेकुलर नहीं हो सकते। लोजपा को यह बात समझनी होगी। वैसे राजद सेकुलर मतों को एकजुट करने के लिए अंतिम दम तक प्रयास जारी रखेगा। लोजपा सहयोगी है। उससे हमारे नेता बात करेंगे।
रामकृपाल यादव, राजद महासचिव