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डाउनलोड करेंपटना. बिहार स्टेट टेक्सट बुक पब्लिशिंग कॉरपोरेशन (बीटीबीपीसी) की डुप्लीकेट किताबें छाप कर बाजार में बेचने का मामला सामने आया है। बुधवार को पीरबहोर थाने के बिड़ला मंदिर रोड के पास 'आकाश गंगा प्रिंटिंग प्रेसऔर खजांची रोड स्थित किताब दुकान 'मनोज बुक एजेंसी में छापेमारी के बाद इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ हुआ।
पुलिस ने प्रेस मालिक मोनाजिर सोहेल (सब्जीबाग) व दुकानदार मनोज कुमार झा (ब्रह्मपुरा, मुजफ्फरपुर) को गिरफ्तार किया। मोनाजिर सोहेल जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का महासचिव है। दोनों जगहों से 50 लाख रुपए मूल्य की किताबें जब्त की गईं। करोड़ों रुपए की ऑटोमेटिक प्रिंटिंग मशीन और अन्य सामान पुलिस ने कब्जे में लिया।
दुकानदार के वेश में पुलिस पहुंची सुबह करीब पांच बजे एसएसपी मनु महाराज को किताबों की अवैध छपाई की खबर मिली। दुकानदार के वेश में दो पुलिस अफसरों ने जालसाजों से संपर्क साधा तो गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद सिटी एसपी जयंतकांत ने पुलिस टीम के साथ छापेमारी की।
सबसे अधिक गणित की किताबें
जब्त किताबें (एनसीईआरटी, नई दिल्ली द्वारा विकसित व बीटीवीपीसी द्वारा प्रकाशित) सातवीं से दसवीं कक्षा तक की हैं। अधिकतर किताबें गणित (नौवीं व दसवीं कक्षा) की हैं।
डुप्लीकेट किताबों का सालाना 100 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। एनसीईआरटी और बीटीबीपीसी के अलावा खासकर प्रतियोगिता परीक्षाओं के जुड़ी किताबें (एस. चांद कंपनी व अन्य) भी इसमें शामिल हैं। बिहार से लेकर झारखंड तक इन किताबों की सप्लाई होती है। इस गोरखधंधे में जालसाज करोड़ों की पूंजी लगा कर प्रेस खोलते हैं। असली किताबों की तरह बेहतर छपाई के लिए कीमती ऑटोमेटिक प्रिंटिंग मशीन रखी जाती हैं। अक्तूबर से फरवरी तक सबसे अधिक छपाई होती है। हालांकि पुलिस ने सीजन की शुरूआत में ही जालसाजों को जोर का झटका दे दिया।
ऐसे बेचते हैं
प्रेस से बाजार तक फैले जालसाजों के नेटवर्क द्वारा बाजार में फर्जी 'स्कारसिटीÓ यानी किताबों की कमी का हवा बनाया जाता है। आशंका है कि सरकारी महकमों के कर्मी भी इसमें रोल निभाते हैं। डुप्लीकेट किताबों को बाजार में उतार कर खपाया जाता है। जल्दी बेचने को कई बार खरीदारों के लिए डुप्लीकेट किताबों की कीमत में 10 से 20 प्रतिशत तक छूट भी दी जाती है।
अधिक कमीशन
असली किताब के मुकाबले डुप्लीकेट किताब में उसकी कुल कीमत का 40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन दुकानदारों को मिलता है। छात्रों के साथ ऐसा क्यों? इस सवाल पर डुप्लीकेट किताब बेचने वाले एक दुकानदार का तर्क था कि 'किताब के मैटर में कोई गड़बड़ी या अंतर नहीं होता है। साथ ही यह आसानी से मिल जाता है। असली किताब में छात्र को भी फायदा-छूट नहीं मिलता है।
पुलिस के रडार पर छह और प्रेस
राजधानी में कई प्रिटिंग प्रेस हैं जहां किताबों की अवैध छपाई होती है। कम से कम आधा दर्जन प्रेस पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस के हत्थे चढ़े प्रेस मालिक व किताब दुकानदार से पूछताछ में इसके सुराग मिले हैं। एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि छपाई की जासलाजी से जुड़े प्रिटिंग प्रेसों के बारे में तफ्तीश की जी रही है।
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