पटना. जदयू की राजनीतिक सलाहकार परिषद की पहली बैठक में ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी दिखी। प्रदेश कार्यालय में बुधवार को हुई बैठक में कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन छोड़कर राजद से दोस्ती करने का विरोध किया। उनका कहना था कि मंत्री भगवान की तरह व्यवहार करते हैं और अफसर बात नहीं सुनते।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कार्यकर्ताओं को समझाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। नीतीश ने कहा कि मैंने कार्यकर्ताओं से बात और सलाह लेने की पहल की है। यह जारी रहेगी। हर माह बैठक होगी। अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए एक बुलेटिन निकालेंगे। लोगों के बीच पर्चे बांटेंगे। 3:10 घंटे की बैठक में नीतीश और प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह सहित 22 कार्यकर्ताओं को ही बोलने का मौका मिला। बैठक अपराह्न 2:35 बजे शुरू हुई, जबकि नीतीश वहां 3:45 बजे पहुंचे।
काम बताओ तो नाक-भौं सिकोड़ते हैं मंत्री-अफसर
नाराज कार्यकर्ता ने कहा कि वोट हम दिलवाते हैं। हमारी मेहनत पर विधायक और मंत्री बनते हैं। लेकिन पद मिलते ही हमें भूल जाते हैं। वोटरों का कोई काम लेकर हम मंत्री-अफसर के पास जाते हैं, तो वे हमें देखकर ही नाक-भौं सिकोड़ने लगते हैं। आलम यह है कि वोटरों से बचते फिरते हैं। शाहाबाद के एक कार्यकर्ता ने कहा-सीओ और बीडीओ तो ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे हम असामाजिक तत्व हों। बैठक में कार्यकर्ताओं ने सुझाव दिया कि एक मॉनिटरिंग सेल बनाई जाए जो हमारी समस्याओं का निराकरण करे।
नीतीश कुमार के सामने नारे
नीतीश को युवा कार्यकर्ताओं का विरोध झेलना पड़ा। युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुशवाहा की कार्यशैली से नाराज दो कार्यकर्ता नीतीश की कार के आगे लेट गए। बंटी चंद्रवंशी और राहुल सिंह का कहना था कि संगठन प्रदेश अध्यक्ष मनमानी करते हैं। नई कार्यकारिणी में पैसे वाले व चाटुकार भरे गए हैं।