पटना/दिल्ली. बिहार में जारी सत्ता संग्राम के बीच मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला। मांझी ने कहा कि नीतीश को लगा था कि वह रबड़ स्टांप मुख्यमंत्री बने रहेंगे। लेकिन जब अपने मन से फैसले करने लगा तो वे छटपटाने लगे। वे सत्ता के बिना नहीं रह सकते हैं। मांझी ने कहा, "मैं 1966 का ग्रैजुएट हूं ऑनर्स के साथ। 35 साल से राजनीति में हूं। नीतीश ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया। उनको लगा होगा कि मैं सो-सो हूं। जो कहेंगे, करूंगा। दो महीने तक मैंने ऐसा किया भी, तो लोग मुझे रबड़ स्टांप सीएम कहने लगे। मेरा स्वाभिमान जागा। मैंने काम करना शुरू किया, तो सबके पेट में दर्द होने लगा। अब वे मुझे गलत तरीके से हटाने में जुटे हैं।" मांझी रविवार को प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद दिल्ली में संवाददाताओं से बात कर थे।
मैं भ्रम में था, अब नीतीश जी का असली चेहरा सामने आ गया
मांझी ने 130 विधायकों के समर्थन के नीतीश के दावे की खिल्ली उड़ाई। उन्होंने कहा, "मैं मुख्यमंत्री हूं और विधायकों का बहुमत भी मेरे साथ है। 20 फरवरी को विधानसभा में बहुमत साबित करूंगा। उस दौरान चाहे जो भी समर्थन दे, लूंगा। सोमवार को राज्यपाल से बात होनी है। वे जब कहेंगे, कैबिनेट का विस्तार कर दूंगा। दो डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। इसमें एक मुस्लिम होगा। 34 की वैकेंसी है। 17 मंत्री बन सकते हैं और इतने ही पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री।"
मांझी ने गाना गाया-'नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे ...। फिर कहा, "अब नीतीश जी का असली चेहरा सामने आ गया है। मैं भी कुछ दिन के लिए भ्रम में था। मैंने जब उनके दायरे से निकल काम करना शुरू किया, तो मुझे हटाने में लग गए हैं।" इस सवाल पर कि भाजपा, सांप्रदायिक है, कहा-"यह तो मन की बात है। कहने की नहीं। गुण-दोष के आधार पर आलोचना-तारीफ सामान्य बात है।"
सीएम ने साफ किया कि जदयू दोफाड़ नहीं है। अब कोई (नीतीश कैंप) सड़क पर निर्णय (विधायक दल बैठक, नेता का चुनाव) ले, तो मैं क्या कर-कह सकता हूं? पार्टी अध्यक्ष को विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है। जब बैठक ही नहीं हुई, तो नेता के चयन और उसको मान्यता का सवाल कहां से आ गया? ऐसा करने वाले लोग बिहार को अस्थिर कर रहे हैं। एक लोकप्रिय सरकार को काम करने से रोक रहे हैं। मैं तो 20 फरवरी को विधानसभा में बहुमत साबित करने की बात कह रहा हूं। नहीं कर पाया, तो इस्तीफा दे दूंगा। एकाध हफ्ता इंतजार में क्या दिक्कत है? इतनी हड़बड़ी क्यों?
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री से कोई राजनीतिक बात नहीं हुई। उन्होंने कहा, "मैंने मौजूदा परिस्थिति में बिहार के विकास के लिए उनसे मदद मांगी। वे तैयार हैं। विशेष राज्य का दर्जा मांगा। गंगा के पानी के उपयोग, बराज नहीं बनाने, दक्षिण बिहार के 12 जिलों में सूखे और बाकी जिलों को बाढ़ से बचाने और स्वच्छता पर बात हुई। मैं शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने विकास के बारे में मेरे सारे मुद्दों पर सहमति दी है।"
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मैं हटा कहां हूं? मैं तो मुख्यमंत्री हूं।" इस सवाल के जवाब में कि शरद यादव 130 विधायकों की बहुमत का दावा कर रहे हैं, मांझी ने एक गंवई कहावत सुनाई-'नऊआ के सिर में केतना बाल … ल देख ल।' फिर हंसते हुए व्यंग्य में बोले,"मैं तो कहता हूं कि उनके साथ 243 विधायक हैं। पता चल जाएगा। मैंने विधानसभा भंग करने की अनुशंसा नहीं की है।" यह पूछने पर कि भाजपा से भी समर्थन लेंगे, मांझी ने कहा,"जो भी देगा, लेंगे। यही तो टेस्ट का समय है। लालू प्रसाद समेत सभी नेता गरीब और दलितों की बात करते रहे हैं। मैं लालू जी से भी मदद मांगूंगा।"
मांझी का आरोप रहा कि विधायकों को डराया, धमकाया जा रहा है। प्रलोभन दिया जा रहा है। उनके खिलाफ माहौल तैयार किया जा रहा है। हर हाल में उनकी सरकार को गिराने की तैयारी है। लेकिन ऐसा होगा नहीं। बीमा भारती ने खुद फोन करके मंत्री विनय बिहारी को बुलाया था और उल्टे विनय और सुमित सिंह को बदनाम किया जा रहा है। पुलिस मामले को देखेगी।
जीतन राम मांझी ने दावा कि उन्होंने बहुत ही कम समय में खासकर सोशल सेक्टर और सोशल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नीतीश कुमार से लंबी लाइन खींची। नीतीश जी ने लड़कियों के लिए बीए तक की मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था की थी। उन्होंने इसे एमए तक किया। नीतीश जी ने मैट्रिक में फर्स्ट डिवीजन से पास करने वालों को 10 हजार रुपए दिलवाए। उन्होंने सेकंड डिवीजन से भी पास करने वालों को आठ हजार दिलाने का इंतजाम कराया।" मांझी ने आगे कहा, "नक्सलवादियों को इसी समाज की भटकी संतान मानता हूं। हर साल ठेकेदार 4 हजार करोड़ रुपए कमा रहे हैं। मैंने नक्सलवादियों को मुख्य धारा से जोड़ने के मकसद से भी ठेके में दलितों के आरक्षण की बात की, तो बहुत लोगों को पेट में दर्द होने लगा। गया में हज भवन बनवाया। अंबेडकर फाउंडेशन बनवाया। यह सब देख मेरे ही घर (जदयू) के लोगों को लगा कि उनकी जमीन हाथ से निकल रही है। मांझी अगर रह गया, तो पता नहीं और क्या-क्या कर देगा?"
आत्मविश्वास से लबरेज दिखे
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांझी का आत्मविश्वास चर्चा का विषय रहा। इसे नरेंद्र मोदी या भाजपा द्वारा सरकार चलाने में मदद के भरोसे से भी जोड़कर देखा गया। उन्होंने हर सवाल का अपने हिसाब से जवाब दिया। मांझी ने अंग्रेजी की दो लाइनें भी बोलीं। सवाल आपस में टकरा जाते थे। मांझी ने कहा, "मेरे चार कान नहीं हैं। आप लोग एक-एक करके पूछिए।" एक दफा कहा, "केतना प्रश्न पूछिएगा?" फिर कहा,"लगता है, अब आप लोगों का सवाल खत्म हो गया है?" एक महिला पत्रकार से मुखातिब होकर कहा कि इनके सवाल को मत दबाइए और जवाब भी दिया। मांझी के अगल-बगल जदयू के बागी ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू और राजीव रंजन थे।
सीएम बोले- नीतीश कह देते तो पद छोड़ देता, अब तो स्वाभिमान की बात है
शरद यादव ने मुझसे कहा कि मैं विधानमंडल दल के नेता के रूप में नीतीश का नाम प्रपोज कर दूं। मैं पूछता हूं कि नीतीश जी ने खुद यह बात मुझसे क्यों नहीं कही? मैंने उनसे कई बार कहा कि मुझे दूसरों से गालियां मत दिलाइए। मैं गरीब जरूर हूं, मगर बेईमान नहीं। नीतीश जी अच्छे आदमी हैं। पता नहीं कैसे गड़बड़ा गए? चार-पांच गलत लोगों के बहकावे में आ गए? अरे, नीतीश जी कह देते तो मैं ऐसे ही हट जाता। अब सब कुछ मेरे स्वाभिमान से जुड़ गया है।
आज आएंगे राज्यपाल, 20 मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर
राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने सीएम की सिफारिश पर 20 मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर किए हैं। इनमें वे 15 भी हैं, जिनकी बर्खास्तगी की सिफारिश मांझी ने की थी। राज्यपाल सोमवार सुबह पटना आएंगे। सभी की नजरें उन पर हैं। 12.30 बजे वे नए मुख्य सूचना आयुक्त एके सिन्हा को शपथ दिलाएंगे। (ये भी पढ़ें-
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इनका इस्तीफा हुआ स्वीकार : विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव, दामोदर राउत, नरेंद्र नारायण यादव, श्याम रजक, अवधेश कुशवाहा, लेशी सिंह, श्रवण कुमार, रामधनी सिंह, जयकुमार सिंह, जावेद इकबाल, बीमा भारती, रंजू गीता, वैद्यनाथ सहनी, विनोद यादव, रामलखन राम, नौशाद आलम, मनोज कुशवाहा, रमई राम और दुलालचंद गोस्वामी।
नीतीश को विस अध्यक्ष ने भी दी मान्यता : विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने नीतीश कुमार को विधानसभा में जदयू विधायक दल के नेता के रूप में मान्यता दे दी है।
भाजपा बोली-नीतीश के कारण संकट : भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "बिहार में संकट का कारण नीतीश की सत्ता पाने की हताशा है।"
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