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  • बिहार में मांझी मुख्यमंत्री बने रहेंगे या जाएंगे, फैसला जल्द होगा

मांझी या नीतीश, फैसला 20 को, मत विभाजन या गुप्त मतदान से होगा निर्णय

6 वर्ष पहले
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पटना. बिहार में जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बने रहेंगे या जाएंगे, इसका फैसला 20 फरवरी को हो जाएगा। यानी 9 दिन मांझी की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। इसी दिन बजट सत्र शुरू हो रहा है। पहले राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी अभिभाषण पढ़ेंगे। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को अभिभाषण के तत्काल बाद विश्वास प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, स्पीकर से कहा है कि विश्वास प्रस्ताव पर फैसला ध्वनिमत से नहीं होगा। चर्चा के बाद मत विभाजन या गुप्त मतदान कराएं। अगर गुप्त मतदान होता है तो वोटों की गिनती सदन में सदस्यों की उपस्थिति में ही होगी। राज्यपाल ने परिणाम की सूचना तत्काल उन्हें देने का निर्देश भी दिया है।

मांझी सरकार का अभिभाषण पढ़ेंगे राज्यपाल
राज्यपाल मांझी सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण ही पढ़ेंगे। हालांकि, दिल्ली में नीतीश ने इस पर सवाल उठाया और कहा- काम हमें करना है तो अभिभाषण भी हमारी सरकार का ही होना चाहिए। हालांकि, तथ्य यह है कि 7 फरवरी की कैबिनेट में जो पहला प्रस्ताव था, वह राज्यपाल के अभिभाषण की मंजूरी का था। इस पर कोई विवाद नहीं था। विस भंग करने के प्रस्ताव पर नीतीश समर्थक मंत्रियों ने वाक आउट किया था।
धैर्य रखें नीतीश
इससे पहले राष्ट्रपति भवन तक विधायकों की परेड कराने पर राज्यपाल ने कहा था कि नीतीश कुमार को धैर्य रखना चाहिए। मैं उचित समय पर फैसला लूंगा। 9 फरवरी को ही उन लोगों ने अपनी मांग मेरे समक्ष रखी है। इतनी हड़बड़ी क्यों है? राज्यपाल हो या न्यायिक विशेषज्ञ, सभी को समय चाहिए। नीतीश कुमार के नेता चुने जाने पर हाईकोर्ट का निर्णय आया है। इसे भी देखूंगा, फिर निर्णय लूंगा।
...तो विस में विपक्ष में बैठेगा जदयू
बहुमत के मांझी-नीतीश के दावे-प्रतिदावे के बीच शक्ति परीक्षण के दौरान जदयू विधानसभा में विपक्ष में बैठेगा। स्पीकर ने विधानसभा में विजय कुमार चौधरी और काउंसिल चेयरमैन ने परिषद में नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल के रूप में मान्यता दे रखी है। दोनों सदनों में भाजपा को मुख्य विपक्षी दल की मान्यता छिन जाएगी। इसके विधानसभा में स्पीकर सहित जदयू के 98 सदस्यों के बूते उसे मुख्य विपक्षी दल की मान्यता मिलने पर नंदकिशोर यादव के स्थान पर विजय कुमार चौधरी नए विपक्ष के नेता हो जाएंगे। उसी तरह परिषद में सुशील मोदी की जगह नीतीश कुमार 41 सदस्यों के बूते विपक्ष के नए नेता हो जाएंगे।
दोनों सदनों में भाजपा के मुख्य सचेतकों को मिली राज्यमंत्री के बराबर की सुविधाएं भी छिन जाएंगी। स्पीकर ने बुधवार को कहा कि जदयू की आेर से विपक्ष में बैठने संबंधी पत्र उनके समक्ष विचाराधीन है। समीक्षा कर उचित समय निर्णय लूंगा। मालूम हो कि 7 फरवरी को जदयू विधानमंडल दल की बैठक में पार्टी के 111 में से मौजूद 97 सदस्यों ने नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना था। इस आधार पर माना जा रहा है कि जदयू के 13 सदस्य बागी हैं।
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