पटना। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सीधे तौर पर भाजपा के नेतृत्व द्वंद्व और जदयू के साथ रिश्तों पर असर डाला है। नतीजों से चारो खाने चित्त हुई भाजपा खेमे में यह बहस छिड़ी है कि नरेंद्र मोदी आगामी लोकसभा चुनाव के विजयरथ के सारथी होंगे या नहीं। दूसरी ओर जदयू को अपने सेकुलर स्टैंड को सही ठहराने और भाजपा को आंखें दिखाने का एक सुनहरा मौका भी मिल गया है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि कर्नाटक के रिजल्ट से एक मैसेज स्पष्ट है कि एक राज्य के आधार पर पूरे देश की परिकल्पना नहीं की जा सकती। रीजनल फैक्टर को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में रीजनल फैक्टर को नजरअंदाज कर नहीं चला सकता। पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा था कि रीजनल पार्टियां राष्ट्रीय एजेंडा तय करने की गलत कोशिश कर रही हैं।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद ने यह भी कहा कि कर्नाटक चुनाव में गवर्नेंस और भ्रष्टाचार ही मुद्दा रहा। लोगों ने पूर्ववर्ती सरकार के भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ सुशासन की उम्मीद में वोट डाले। उनके सामने जो विकल्प दिखा, उसे वोट दिया।
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