पटना. बीएमएसआईसीएल ने अपने दर अनुबंध (रेट कांट्रेक्ट) की तुलना राज्य स्वास्थ्य समिति के वर्ष 2014-2016 (राउंड-10) के दर अनुबंध से कर दवा खरीदा या नहीं। स्वास्थ्य विभाग के सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता वाली विशेष कमेटी इसकी भी जांच कर रही है। ऐसे में विशेष कमेटी के इस बिंदु पर जांच करने से केके सिंह कमेटी के जांच आधार पर ही सवाल उठने लगा है।
सवाल यह है कि बीएमएसआईसीएल ने वर्ष 2014 में दवाएं खरीदीं, तो केके सिंह कमेटी ने अपनी जांच में उसकी तुलना राज्य स्वास्थ्य समिति के वर्ष 2012-2014 के दर अनुबंध (राउंड-9) से क्यों की। बीएमएसआईसीएल के जिस दवा खरीद घोटाले का मामला उजागर हुआ है, वे दवाएं वर्ष 2014 में खरीदी गई हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2012 के दवा की कीमत पर क्या वर्ष 2014 में दवा की सप्लाई संभव है।
इस व्यवहारिक बिंदु पर केके सिंह कमेटी का ध्यान क्यों नहीं गया। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता वाली विशेष कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही तथ्य सामने आ पाएगा कि दवा खरीद की प्रक्रिया गलत थी कि बीएमएसआईसीएल ने जानबूझ कर ज्यादा कीमत पर दवा खरीद कर घोटाला किया।
जनवरी में ही लिखा था पत्र
स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष जनवरी में ही बीएमएसआईसीएल को पत्र लिखकर कहा था कि राउंड-9 का दर अनुबंध अक्टूबर, 2011 में किया गया है। ऐसे में बीएमएसआईसीएल द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले दवा के लिए राउंड- 9 से तुलना करना उचित नहीं है। चूंकि, राज्य स्वास्थ्य समिति के राउंड-10 के 112 दवाओं में से 31 दवाओं की दर बीएमएसआईसीएल के निर्धारित दर में अधिक है।
इसलिए राउंड-10 के दरों से अधिक दर पर किसी भी परिस्थिति में दवा खरीद करना उचित नहीं है। यह देखते हुए बीएमएसआईसीएल राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा किये गये दर अनुबंध से अपनी तुलनात्मक समीक्षा कर लें। इस निर्देश का बीएमएसआईसीएल ने कितना पालन किया, इसकी भी जांच की जा रही है।