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एम्स में होगा कोकलियर इंप्लांट और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट

8 वर्ष पहले
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पटना. राज्य के लोगों के लिए राहत की खबर है। मुख्य रूप से उनके लिए जिन्हें बिल्कुल सुनाई नहीं पड़ता। ऐसे लोगों का इलाज पटना एम्स में तीन महीने में शुरू हो जाएगा। पटना एम्स में तीन मॉड्यूलर ओटी के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।

तीन मॉड्यूलर ओटी व गैस पाइपलाइन की सुविधा तीन महीने में मिलने लगेगी। बाकी 27 मॉड्यूलर ओटी निर्माण की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद कोकलियर इंप्लाट, ज्वायंट रिप्लेसमेंट, नी रिप्लेसमेंट, हिप रिप्लेसमेंट संभव हो जाएगा। बाकी मॉड्यूलर ओटी का निर्माण कार्य होने पर यहां तमाम जटिल आपरेशन और ट्रांसप्लांट की सुविधा बहाल हो जाएगी। अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और आस्ट्रेलिया से और 17 डॉक्टर पटना एम्स आने के इच्छुक हैं। इसमें कुछ ट्रांसप्लांट के एक्सपर्ट हैं तो कुछ स्टेम सेल तो कुछ जेनेटिक रिसर्च का काम करेंगे।

क्या है कोकलियर इंप्लांट...

कुछ ऐसे बच्चे पैदा होते हैं जिन्हें जन्म से सुनाई नहीं देता या जिनको बिलकुल सुनाई नहीं देता। सुनने वाले उपकरण से भी सुनाई नहीं पड़ता। उन्हें कोकलियर इंप्लांट की जरूरत होती है। अमूमन यह परेशानी पैदाइशी होती है। पीएमसीएच के ईएनटी विशेषज्ञ (सर्जन) डॉ. सतीश कुमार के मुताबिक राज्य में ऐसे बच्चों का कोई आंकड़ा तो नहीं है पर इनकी संख्या हजारों में होगी।

कोकलियर इंप्लांट में कान का आपरेशन करके एक उपकरण अंदर डाला जाता है और एक मशीन बाहर रहता है। वैसे यह इंप्लांट उन्हीं में किया जाता है जिनका सुनने का आंतरिक सिस्टम ठीक हो और सुनने का तंत्र किन्ही कारणों से विकसित नहीं हुआ हो। यह काफी जटिल ऑपरेशन होता है। इंप्लांट के बाद बच्चे को कुछ दिनों तक ट्रेनिंग देनी पड़ती है। क्योंकि उसने तो कभी सुना ही नहीं। कलम है या कमल उसे क्या पता। पर धीरे-धीरे वह लय पकड़ लेता है।

ती माह में तीन मॉड्यूलर ओटी

तीन महीने में तीन मॉड्यूलर ओटी बनकर तैयार हो जाएगा। फिलहाल तीन मॉड्यूलर ओटी बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। मॉड्यूलर ओटी तैयार होने पर कोकलियर इंप्लांट, ज्वायंट, हिप, नी रिप्लेसमेंट की सुविधा यहां के लोगों को मिलने लगेगी। डॉ. गिरीश कुमार सिंह, निदेशक, पटना एम्स

पीएमसीएच : खुलेगी लैंग्वेज लैब

पटना मेडिकल कॉलेज में लैंग्वेज लैब खुलेगी। इस पर करीब 30 लाख रुपए खर्च होंगे। इसमें लैपटॉप और माइक की व्यवस्था होगी। लैपटॉप पर देखकर ही शिक्षक से जवाब-सवाल कर सकते हैं। प्राचार्य डॉ. एनपी यादव से आरएन टेकनोलॉजी से संपर्क किया है। डॉ. यादव का कहना है कि लैंग्वेज लैब की व्यवस्था होने से छात्रों को काफी सहूलियत हो जाएगी।

पटना मेडिकल कॉलेज में लैंग्वेज लैब खुलेगी। इस पर करीब 30 लाख रुपए खर्च होंगे। इसमें लैपटॉप और माइक की व्यवस्था होगी। लैपटॉप पर देखकर ही शिक्षक से जवाब-सवाल कर सकते हैं। प्राचार्य डॉ. एनपी यादव से आरएन टेकनोलॉजी से संपर्क किया है। डॉ. यादव का कहना है कि लैंग्वेज लैब की व्यवस्था होने से छात्रों को काफी सहूलियत हो जाएगी।

पीएमसीएच ने कैंपस में हरियाली बरकरार रखने के लिए नारा दिया है 'क्लीन पीएमसीएच ग्रीन पीएमसीएचÓ। इसके लिए सांकेतिक तौर पर प्राचार्य कार्यालय के सामने ग्रीन पार्क बन रहा है। पार्क का फ्लोर और दीवार भी हरा रहेगा। इससे लोग साफ-सफाई और हरियाली रखने के प्रति जागरूक होंगे।