पटना। कांग्रेस से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नजदीकी बढ़ रही है तो उधर सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह मुख्यमंत्री के करीब आ रहे हैं। लंबे समय के बाद दोनों एक साथ एक मंच पर 22 मई को लखीसराय में दिखायी देंगे। ललन जदयू के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और नीतीश कुमार के खास भी।
dainikbhaskar.com से बातचीत करते हुए ललन सिंह ने इस बात की पुष्टि की कि वे मुख्यमंत्री के साथ उस कार्यक्रम में रहेंगे। लखीसराय में कई योजनाओं का शिलान्यास नीतीश कुमार के हाथों होना है। स्थानीय सांसद होने के नाते ललन सिंह भी उस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। सिंह मुंगेर से सांसद हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी सेवा यात्रा के क्रम में वह लखीसराय की विभिन्न योजनाओं का शिलन्यास करने वाले हैं। स्थानीय सांसद की हैसियत से वह उस कार्यक्रम में कैसे नहीं रहेंगे? मालूम हो कि लालू प्रसाद से अगल होकर नीतीश कुमार जब समता पार्टी बना रहे थे, तब उसमे ललन सिंह की बड़ी भूमिका थी। बाद में पशुपालन घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उन्होंने पटना हार्ईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
जब पूछा गया कि क्या उनकी पुराने घर में वापसी हो रही हैं? उन्होंने कहा कि तकनीकी तौर पर वह जदयू के सांसद हैं और ऐसे में उनके पुराने घर में जाने का सवाल ही कहां हैं। मैं तो पहले से ही पुराने घर में बना हुआ हूं। उनका कहना था कि किसी दूसरी पार्टी में जाने के बारे में पूछा जाता तो वह अपनी बात करते।
मुंगेर से जदयू के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतने वाले ललन सिंह 2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पाले में चले गये थे। तब टिकट बंटवारे में उनकी भी चली थी। जवाब में जदयू ने उन्हें छह साल के लिए उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। जदयू के एक वरीय नेता ने कहा: निलंबत मुक्त करने का फैसला होते ही वे हमारे साथ होंगे। पार्र्टी के शीर्ष स्तर पर ऐसा विचार चल भी रहा है। महाराजगंज संसदीय सीट पर हो रहे उप चुनाव को देखते हुए इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जातीय समरकरणों के मद्देनजर इसका अपना महत्व है।