पटना

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जान जोखिम में डाल इस शख्स ने मानी न हार,लालू का किया 'फंदा' तैयार!

दोषी करार दिए जाने के बाद लालू का राजनीतिक कॅरिअर खत्‍म होने का खतरा बढ़ गया है।

Danik Bhaskar

Oct 03, 2013, 12:00 AM IST
पटना। चारा घोटाले के एक मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद लालू का राजनीतिक करिअर खत्‍म होने का खतरा बढ़ गया है। कोर्ट ने चार आरोपियों को 15 लाख रुपए गबन करने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई है। वहीं, आज कोर्ट ने लालू को भ्रष्‍टाचार निषेध कानून (प्रिवेंशन ऑफ करप्‍शन एक्‍ट) के तहत कम से कम 5 साल और 25 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
5 साल की सजा होने के साथ ही लालू ने जहां लोकसभा की सदस्यता गंवा दी, वहीं अगले 11 साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक शख्स का हाथ है। उस शख्स का नाम यूएन विश्वास है। तब विश्वास सीबीआई की ओर से इस घोटाले की जांच करने वाले प्रमुख अधिकारी हुआ करते थे।
विश्वास को मिल रही थीं धमकियां
चारा घोटाले में लालू यादव, जगन्नाथ मिश्र के अलावा बिहार के कई बड़े नाम सामने आए थे। ऐसे में सीबीआई के लिए जांच करना भी मुश्किल हो रहा था। 30 जून, 1997 को यूएन विश्वास ने पटना हाईकोर्ट में कहा था, ‘हमारे अफसरों को हत्या की धमकियां मिल रही हैं, इसलिए राजनीतिक आरोपियों को गिरफ्तार करना संभव नहीं हो पा रहा।’ वे बुलेटप्रूफ गाड़ी में चलते थे।
बदल दी थी रिपोर्ट
एक बार सीबीआई के जूनियर अफसरों ने स्टेट्स रिपोर्ट को बदल दिया था। विश्वास ने जब बताया तो हाईकोर्ट ने उन्हें सीलबंद रिपोर्ट सीधे कोर्ट में दाखिल करने को कहा।
आगे की स्लाइड्स में जानें चारा घोटाले से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें, साथ में देखें लालू यादव की पहली बार गिरफ्तारी की कुछ और तस्वीरें, साथ में जानें कहां-कहां लगाया गया था घोटाले का पैसा....
गवाहों की हत्या भी हुई
 
गढ़वा जिले में तैनात पशुपालन विभाग के एक डॉक्टर की जब हत्या हुई तो उसकी पत्नी ने आरोप लगाया कि किसी खास फाइल को लेकर एक अन्य अफसर से उनके पति की बकझक हुई थी। वे काफी तनाव में रहते थे। संभव है कि हत्या के पीछे यही कारण हो। सुनवाई शुरू हुई तो कुछ आरोपितों और गवाहों की संदिग्ध मौतें हुईं। अखबारों में शंका जाहिर की जाती रही कि इन हत्याओं के पीछे घोटालेबाज हो सकते हैं।
 
फिल्मों में भी लगाया पैसा
 
पशुपालन विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक (प्लानिंग) डॉ. कृष्ण मोहन प्रसाद सहित अन्य आरोपियों ने मुंबई में उन दिनों कुछ फिल्मों में भी पैसे लगाए थे। जब छापा पड़ा तो 60 लाख रुपए फिल्म में लगाने के कागजी सबूत मिले थे।
 
177 किलो सोना खरीदा
 
डॉ. कृष्ण मोहन प्रसाद ने 85 किलोग्राम सोना खरीदा था। इसी प्रकार विभाग के संयुक्त क्षेत्रीय निदेशक डॉ. श्याम बिहारी सिन्हा (अब मृत) ने 32 किलोग्राम, आपूर्तिकर्ता दयानंद प्रसाद कश्यप और त्रिपुरारी मोहन प्रसाद ने 30-30 किलोग्राम सोना खरीदा।
(फोटो कैप्शन- लालू यादव की एक फाइल तस्वीर)
सवा करोड़ में ममता कुलकर्णी का डांस
 
घोटालेबाजों ने 1995 में पटना के एक गुप्त स्थान पर फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को नचवाया। सीबीआई ने मुंबई जाकर इस संबंध में ममता से पूछताछ भी की। एक अपुष्ट सूचना के अनुसार इस कार्यक्रम पर करीब सवा करोड़ रुपए घोटालेबाजों ने लुटाए।
 
179 साल की सजा एक अभियुक्त को
 
चारा घोटाला में प्रमोद कुमार जायसवाल को कोर्ट ने कुल 179 साल की सजा सुनाई थी। इनकी मौत हो चुकी है। उन्हें 32 मामलों में नामजद अभियुक्त बनाया गया था। जायसवाल ने कोर्ट में आवेदन देकर खुद अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था।
जांच का टर्निग प्वाइंट: 61 बक्से फर्जी आवंटन पत्र बरामद 
 
जांच के दौरान सीबीआई को पुख्ता साक्ष्य नहीं मिल रहे थे। घोटालबाजों ने ट्रेजरी से घोटाले से जुड़े कागजात की कार्बन कॉपी तक गायब कर दी थी। अगस्त 1996 में एक सप्लायर ने बताया कि रांची के कांके प्रखंड स्थित लाइव स्टॉक रिसर्च सेंटर में कुछ कागजात रखे गए हैं। सीबीआई के अफसरों ने वहां छापा मारकर 61 बक्सा डाक्यूमेंट जब्त किए। इसमें फर्जी आवंटन पत्र, आदेश की प्रति और बिल आदि थे। यह बरामदगी जांच का बड़ा आधार बनी। फिर जांच आगे बढ़ी।
 
नियमों को तोड़कर घोटालेबाजों की बढ़ाई सेवा अवधि, सेवा विस्तार पर थी सरकार की रोक
 
1991 से ही रिटायरमेंट के बाद राज्यकर्मियों को सेवा विस्तार पर मनाही थी। इस नियम को बदलने की इजाजत भी नहीं थी। इसके बावजूद लालू प्रसाद ने घोटाले के किंगपिनों को सेवा विस्तार दिया। रांची के क्षेत्रीय पशुपालन निदेशक डॉ. श्याम बिहारी सिन्हा 31 दिसंबर 1993 को रिटायर हो रहे थे। चार दिसंबर को उन्होंने अपनी प्रशंसा करते हुए अच्छे स्वास्थ्य के आधार पर दो साल का सेवा विस्तार का आवेदन दिया। इसके बाद विपक्ष के नेता डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को पत्र लिख कर डॉ. श्याम बिहारी सिन्हा को दो साल का सेवा विस्तार देने की सिफारिश की थी। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि डॉ. सिन्हा सुयोग्य एवं कर्मठ हैं, इनकी सेवा सराहनीय रही है। योजनाओं की प्रगति एवं गुणवत्ता में रुकावट नहीं आए, इसलिए इन्हें दो साल के लिए सेवा विस्तार देना जनता के हित में होगा। इसके बाद लालू प्रसाद ने उन्हें एक साल के लिए सेवा विस्तार दे दिया।
(फोटो कैप्शन- लालू यादव की एक फाइल फोटो)
घोटाले के दूसरे किरदार पशुपालन विभाग के प्रशासी पदाधिकारी आरके दास 28 फरवरी, 1994 को रिटायर होने वाले थे। उन्होंने 23 फरवरी को अपने सेवा विस्तार के लिए यह कहकर आवेदन दिया कि निबंधक रैंक में उनकी प्रोन्नति होने वाली है। अगले ही दिन लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को पत्र लिख कर आरके दास को भी दो साल का सेवा विस्तार देने की सिफारिश की थी। लिखा था कि ये स्वस्थ एवं स्वच्छ छवि के पदाधिकारी हैं। इनकी सेवानिवृत्ति के बाद विभाग में इनके कैडर का कोई जानकार पदाधिकारी नहीं रह जाएगा। लालू प्रसाद ने इन्हें भी एक साल का सेवा विस्तार दे दिया।
 
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. गिरजानंदन शर्मा 30 नवबंर, 1993 को रिटायर हो रहे थे। उनके विरुद्ध पुलिस केस भी चल रहा था। सीएम लालू प्रसाद ने उसी पद पर छह माह के लिए डॉ. शर्मा को फिर से नियुक्त करने का आदेश दे डाला। फ्रोजेन सीमेन बैंक के परियोजना पदाधिकारी डॉ. इंदुभान प्रसाद का 31 अक्टूबर 1993 को रिटायरमेंट था। उन्हें भी छह माह के लिए एक्सटेंशन दिया गया।

लालू की एक और तस्वीर.... 

 

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