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मीडिया पर सेंसरशिप को ले बिहार विधानसभा में हंगामा, नारेबाजी

9 वर्ष पहले
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पटना। बिहार में मीडिया पर अघोषित सेंसरशिप लगाने संबंधी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट को लेकर आज बिहार विधान सभा में विपक्ष ने भारी हंगामा किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। एक मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और प्रतिपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के बीच नोंकझोंक भी हो गयी।
सदन में यह मामला शून्यकाल के दौरान राजद के विधायकों ने उठाया। उनका कहना था कि सरकार ने मीडिया की जुबान बंद कर दी है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया है कि मीडिया को सरकार ने नियंत्रित कर लिया है। पत्रकारों को प्रताडि़त किया जा रहा है। नाराज राजद सदस्य वेल में घुस गये और प्रेस की आजादी पर हमला बंद करो औैर मीडिया को आजाद करो जैसी नारेबाजी करने लगे।
नारेबाजी के बीच उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि विपक्षी सदस्य जिस रिपोर्ट को लेकर शोर मचा रहे हैं, उस रिपोर्ट पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी ही नहीं मिली है। वह रिपोर्ट कहीं से लीक हुई है। क्या ऐसी रिपोर्ट पर सदन में चर्चा होगी? उन्होंने कहा कि जिस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, वह अधिकृत दस्तावेज नहीं है। ऐसे में अनधिकृत रिपोर्ट पर बात कैसे होगी?
प्रतिपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मोदी की बातों का कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की वेब साइट पर यह रिपोर्ट डाली गयी है। यह अधिकृत रिपोर्ट है और सरकार इस पर बात करने से भाग रही है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट की सत्यता के बारे में काटजू से बात करनी चाहिए। सिर्फ यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि रिपोर्ट अधिकृत नहीं है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को लेकर मोदी बिना वजह चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने कहा: हम मोदी की चुनौती स्वीकार करते हुए कहना चाहते हैं कि यह रिपोर्ट पूरी तरह अधिकृत है।
मालूम हो कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की तीन सदस्यीय टीम ने बिहार में मीडिया के सरकारी नियंत्रण को लेकर हाल ही में रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडिया पर सरकार की ओर से दबाव कायम है और वह वास्तविक खबरों के प्रकाशन से परहेज कर रही है।