पहले चरण के चुनाव में बढ़े हुए वोट किसके हैं?, सबको लग रहा उनका लाभ

8 वर्ष पहले
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पटना. पहले चरण में छह लोकसभा सीटों पर हुए भारी मतदान ने राजनीति हलकों में नई बहस छेड़ दी है। पहले चरण में राज्य के नक्सलग्रस्त छह सीटों पर इस बार 11.50 फीसदी ज्यादा लोगों ने वोट क्या डाले, सभी दलों ने इन्हें अपना समर्थक बताना शुरू कर दिया। लोगों के बीच भी कयासबाजियों का दौर जारी है।

भाजपाई इसे नमो की देशव्यापी लहर से जोड़कर देख रहे हैं। उनका तर्क है देश में बदलाव चाह रही जनता ने इस बाद वोट के जरिए कांग्रेस के प्रति अपने गुस्से का इजहार किया है। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों में आए उभार के कारण वोट परसेंटेज में वृद्धि हुई है। कांग्रेसियों का कहना है कि युवा वोटर राहुल गांधी के कांग्रेस के युवा नेतृत्व के साथ जुड़ रहे हैं, जिसकी परिणति वोट रूप में दिख रही है। राजद इस पिछड़ा वर्ग में एक बार फिर आए उभार के रूप में देख रहा है, तो जदयू का तर्क है कि इस चुनाव में अधिक मतदान के पीछे महादलितों और महिलाओं के बीच मोबेलाइजेशन प्रमुख कारण है।

सबको लग रहा कि उसे ही होगा लाभ

मतदान के प्रतिशत में वृद्धि का कारण दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या में बढोतरी है। ये वोटर राजद कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में वोट कर रहे हैं। पहले चरण की छह सीटों के ट्रेंड से यह तथ्य उभर कर सामने आया है।

अशोक चौधरी, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस

ये वोट युवा, महिला और उत्साहित लोगों के हैं, जो देश में बदलाव के पक्षधर हैं। इसका सीधा फायदा भाजपा और एनडीए को मिल रहा है।

मंगल पांडेय, अध्यक्ष, प्रदेश भाजपा

राजनीति में दो धाराओं के बीच चल रही रस्साकसी का परिणाम है वोट परसेंटेज में वृद्धि। युवा मतदाताओं का रुझान पूरी तरह सेकुलर जमात की ओर है। इसमें राजद और कांग्रेस गठबंधन आगे है।

रामचंद्र पूर्वे, अध्यक्ष, प्रदेश राजद

महादलित, युवा, महिलाएं और गरीब दर्ग के मतदाता निडर होकर इस चुनाव में वोट डाल रहे हैं, जिसका सीधा लाभ जदयू को मिल रहा है। संजय सिंह, प्रवक्ता, जदयू