पटना. सांसद पप्पू यादव बिहार की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण चेहरा माने जाते हैं। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव और उनकी पत्नी दोनों ही सांसद चुने गए। पप्पू यादव का राजनीतिक करियर जितना चर्चा में रहा है, उतनी ही उनकी प्रेम कहानी भी। फिलहाल वेलेंटाइन वीक चल रहा है। इसी अवसर पर आपके लिए लेकर आए हैं एक नेता की प्रेम कहानी...
पप्पू यादव की प्रेम कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। पप्पू राजद सांसद हैं तो उनकी पत्नी रंजीता रंजन कांग्रेस की सांसद हैं। पप्पू को लोग कभी बाहुबली नेता के रूप में जानते थे। राजनीतिक हत्या के आरोप में (हालंकि बाद में कोर्ट ने इन्हें इससे बरी कर दिया) जब ये जेल में सजा काट रहे थे, तब पप्पू को प्रेम हो गया। लेकिन पप्पू यादव को अपनी प्रेमिका रंजीता रंजन को मनाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े। पप्पू को अपने प्यार को पाने के लिए पटना, दिल्ली और चंडिगढ़ के कई चक्कर लगाने पड़े। कई ऐसे मोड़ आए जब लगा सब कुछ बिखर गया, लेकिन ये पप्पू यादव की जिद ही थी कि उन्होंने अपनी प्यार को पाकर ही दम लिया। पप्पू अपनी प्रेमिका को फोटो में ही देखकर कुछ इस कदर फिदा हो गए कि फिर वे सब कुछ भूल कर उसकी मात्र एक झलक पाने के लिए हर दिन टेनिस कोर्ट पहुंच जाया करते थे। यहां पर ही उनकी प्रेमिका रंजीता रंजन प्रति दिन टेनिस खेलने आया करती थी।
कुछ यूं शुरू हुई प्यार की कहनी
ये बात 1991 की है। तब पप्पू यादव पटना के बांकीपुर जेल में बंद थे। पप्पू अक्सर जेल अधीक्षक के आवास से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे। इन्हीं लड़कों में रंजीता के छोटे भाई विक्की भी थे। इन लड़कों से मिलने-मिलाने के क्रम में विक्की से पप्पू यादव की नजदीकी बढ़ गई। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पप्पू यादव ने विक्की के फैमिली एलबम में रंजीता की टेनिस खेलती हुई तस्वीर देखी। पप्पू फोटो देखकर रंजीता पर फिदा हो गए और फिर शुरू हुई अपने प्रेम प्रस्ताव को लेकर रंजीता तक पहुंचने की लंबी जंग। पप्पू यादव जेल से छूटने के बाद रंजीता से मिलने के लिए अक्सर उस टेनिस क्लब में पहुंच जाते थे, जहां वो खेला करती थीं। रंजीता को ये सब पसंद नहीं था। उन्होंने पप्पू यादव को कई बार आने के लिए मना किया। मिलने से रोका और फिर भी नहीं मानने पर कड़े शब्दों रंजीता ने इसका विरोध भी किया। लेकिन पप्पू इससे विचलित नहीं हुए और अपने प्यार को पाने के लिए डटे रहे।
एक बार तो रंजीता ने यहां तक कह दिया कि वे सिख हैं और पप्पू हिंदू। उनके परिवार वाले ऐसा होने नहीं देंगे। पप्पू यादव ने अपनी पुस्तक 'द्रोहकाल का पथिक' में विस्तार से अपने प्रेम-प्रसंग का वर्णन किया है। उन्होंने लिखा है कि कैसे हताश-परेशान होकर उन्होंने एक बार नींद की ढेरों गोलियां खा ली थी। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया। इसके बाद रंजीत का व्यवहार थोड़ा सामान्य हुआ और फिर बात आगे बढ़ी थी।
कुछ यूं बेलने पड़े पापड़
रंजीता रंजन के माता पिता ग्रंथी थे और इस विवाह के खिलाफ थे। लेकिन पप्पू यादव के आनंद मार्गी पिता चंद्र नारायण प्रसाद और माता शांति प्रिया की ओर से कोई समस्या नहीं थी। जब रंजीता के परिजनों की ओर से शादी की मंजूरी नहीं मिली तो पप्पू यादव, रंजीता के बहन-बहनोई को मनाने चंडीगढ़ पहुंच गए। लेकिन यहां भी पप्पू की नहीं चली। दिल्ली में रंजीता के एक और बहनोई ने भी पप्पू यादव की बात नहीं माने। पप्पू यादव इससे निराश हो गए। इसी बीच उन्हें पता चला कि कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया उनकी मदद कर सकते हैं। पप्पू यादव उनसे मिलने दिल्ली जा पहुंचे और फिर उनसे मदद की गुहार लगाई।
एसएस अहलूवालिया साहब की पहल से रंजीत के सिख परिजनों को मनाने में मदद मिली। पप्पू यादव ने अपनी किताब में भी इस बात की चर्चा अपनी किताब में की है। पप्पू यादव की शादी पहले पूर्णिया के गुरुद्वारे में होनी तय हुई। लेकिन फिर तय हुआ कि शादी आनंद मार्ग की पद्धति से होगी। इस बीच रंजीता और उनके परिजनों को लेकर आ रहा चार्टर्ड विमान रास्ते में ही भटक गया और देरी के कारण हंगामा मच गया।
लेकिन बाद में पता चला कि विमान का पायलट रास्ता भटक गया था। खैर विमान पहुंचा और लोगों ने राहत की सांस ली। शादी को लेकर पूर्णिया की सड़कों को पूरी तरह सजा दिया गया था। शहर के सारे होटल और गेस्ट हाउस बुक थे। आम और खास सबके लिए व्यवस्था की गई थी। इस शादी में चौधरी देवीलाल, लालू प्रसाद, डीपी यादव और राज बब्बर भी शामिल हुए और फरवरी 1994 में पप्पू यादव और रंजीता की शादी हो गई।
पप्पू यादव कहते हैं कि वे और रंजीता सर्वश्रेष्ठ दोस्त रहे हैं। वे कहते हैं, "रंजीत जी खुद आध्यात्मिक हैं। बहुत अच्छा बोलती हैं। व्यक्तित्व बहुत अच्छा है। ईमानदारी से जीतीं हैं। लाग-लपेट में नहीं रहती हैं। बच्चों के लिए बेस्ट मां हैं' पप्पू यादव मधेपुरा से राजद के टिकट पर और उनकी पत्नी रंजीता रंजन सुपौल से कांग्रेस के टिकट पर इस दफा चुनाव जीती हैं। यह बिहार का पहला जोड़ा है, जो एक साथ संसद भवन में प्रवेश पाया है।
आगे देखिए पप्पू और रंजीता रंजन की फोटो....