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निगम बना मेयर-आयुक्त जंग का मैदान

7 वर्ष पहले
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पटना. नगर आयुक्त और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद गुरुवार को दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया। सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों और वार्ड पार्षदों ने मौर्यालोक स्थित निगम कार्यालय में करीब पांच घंटे तक नगर आयुक्त कुलदीप नारायण का इंतजार किया। वे यहां धरना देने व उनसे सवाल जवाब करने आए थे। जब वे दफ्तर नहीं आए, तो उन्होंने निगम कार्यालय पर ही अपनी भड़ास निकालनी शुरू कर दी। नारेबाजी की, आयुक्त को निकम्मा कहा। कुछ पार्षदों ने अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया।

तो लगा देंगे ताला

सशक्त स्थायी समिति की सदस्य सह पार्षद आभा लता ने कहा कि मांगों पर आचार संहिता लगने से पहले विचार नहीं हुआ, तो निगम कार्यालय में ताला लगा दिया जाएगा। सभी पार्षद भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। पार्षदों का धरना 12 सूत्री मांगों को लेकर था। इसमें उनके साथ सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने भी भाग लिया। मेयर अफजल इमाम ने भी अप्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन किया। जब नगर आयुक्त कुलदीप नारायण से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि उनकी तबियत खराब थी, इसलिए वह ऑफिस नहीं जा सके।

आदेश भी नहीं मानते
धरने पर बैठे संजीव कुमार ने कहा कि कितने दुख की बात है कि शहर में यूरिनल नहीं है। धरने पर बैठे पार्षदों ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। वार्ड नंबर 67 के पार्षद मनोज कुमार ने कहा कि सशक्तस्थायी समिति और बोर्ड से विकास की योजनाएं पारित होने के बाद भी नगर आयुक्तउसे लागू नहीं करा पा रहे हैं। सरकार द्वारा दिए जा रहे आदेश को नगर आयुक्त नहीं मानते हैं।

एक फरवरी को होगी निगम बोर्ड की बैठक
मेयर ने कहा कि 27 जनवरी को स्थगित बैठक एक फरवरी को होगी। बैठक में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए एजेंसी का चयन और सीवरेज सिस्टम के लिए तैयार डीपीआर का अनुमोदन का रास्ता साफ होगा। नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव ने 29 जनवरी को मेरे सामने आयुक्तको डीपीआर का अनुमोदन और इससे संबंधित एमओए पर हस्ताक्षर का आग्रह किया था। उनका कहना था कि यह नहीं होने पर पटना शहर को 2700 करोड़ की बड़ी योजना से हाथ धोना पड़ेगा, लेकिन आयुक्तने आग्रह ठुकरा दिया।

पार्षदों के 12 सवाल और मांगें

वार्डों के विकास के लिए 15 लाख और 10 लाख रुपए की योजनाओं को पूरा करें। शहर में यूरिनल का निर्माण आज तक क्यों नहीं हुआ? मौर्यालोक का अब तक सौंदर्यीकरण क्यों नहीं हुआ? मेंटेनेंस राशि के गबन की जांच क्यों नहीं की गई? पटना शहरी क्षेत्र में सशक्त स्थायी समिति और निगम बोर्ड से पारित 51 पार्किंग की व्यवस्था क्यों नहीं हुई? नगर निगम में हो रहे घोटाले और निगम कागजातों की चोरी करने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जनहित में भवन निर्माण के नक्शे पर लगाई गई रोक अविलंब हटाई जाए? निगम के पैनल अधिवक्ता एचएस हिमकर को अब तक क्यों नहीं हटाया गया? नगर विकास एवं आवास विभाग से शहर के विकास के लिए आई योजनाओं का अब तक क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ? शव वाहन की खरीदारी और विद्युत शवदाह गृहों की मरम्मति अब तक क्यों नहीं हुई? निगम में कर्मचारियों की लंबित अनुकंपा पर नियुक्ति अब तक क्यों नहीं हुई? बिहार जल पर्षद में विचलन किए गए निगम की 60 लाख रुपए वापस क्यों नहीं हुए? स्लम बस्तियों में जनसुविधाओं की व्यवस्था आज तक क्यों नहीं हुई?

चूडिय़ां न पहना दूं....
पार्षद शहजादी बेगम ने कहा कि आयुक्तको निगम से हटाया जाए। उनका ट्रांसफर करें। कहीं ऐसा न हो कि हटने से पहले मैं उन्हें चूडिय़ां पहना दूं। हम पार्षदों को चोर कहा जा रहा है, जबकि अपने पैसे से वार्ड को रोशन कर रहे हैं। नगर आयुक्त निरीक्षण कर देख लें।

लाठी-गोली से नहीं डरेंगे
बालेश्वर सिंह ने कहा कि विकास की लड़ाई में लाठी चले या गोली, हम डरने वाले नहीं हैं। विनोद कुमार ने कहा कि नगर आयुक्त की विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं है। जनहित के मुद्दों पर हर पार्षद को एक होना चाहिए।

धरने में ये रहे शामिल
धरना देने वालों में पार्षद सह सशक्त स्थायी समिति के सदस्य जयनारायण शर्मा, विनोद कुमार, विनोद गुप्ता, संजय कुमार, शेखर सिंह, प्रमिला सिंह, प्रभा देवी, पिंकी कुमारी, शकुंतला देवी आदि मौजूद थे।

...चलो मान लो कि मैं डरपोक हूं : कुलदीप
किसी भी तरह से मुझे परेशान करने की कोशिश की जा रही है। वे लोग जबर्दस्ती काम कराना चाहते हैं। काम करने ही नहीं देते हैं। मेरा ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर पार्षद यह सोचते हैं कि डर से मैं दफ्तर नहीं आया, तो हां मैं डरपोक हूं।
कुलदीप नारायण, नगर आयुक्त
खास कंपनी को लाभ दिलाने की कोशिश
मेयर ने कहा कि कचरा प्रबंधन के लिए उपकरणों की खरीद और डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए एजेंसी का चयन करना है। यह एजेंडा निगम बोर्ड से पारित हो गया। प्री-बीड मीटिंग के बाद यह एजेंडा पहले ही निगम बोर्ड में आ जाना चाहिए था, लेकिन इसमें भी आयुक्त द्वारा जान बुझकर देरी की गई। स्थायी समिति और बोर्ड ने जो संशोधन किए हैं उसे भी टेंडर डमें शामिल नहीं किया गया।

मेयर पर आरोप, अपनी नाकामी आयुक्त पर थोप रहे हैं
नगर निगम कार्यालय के समक्ष सशक्त स्थायी समिति सदस्यों और वार्ड पार्षदों द्वारा धरना देने पर वार्ड पार्षद विनय कुमार पप्पू समेत २९ पार्षदों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर अफजल इमाम को मेयर के पद से हटाने की मांग की है। विनय कुमार पप्पू ने बताया कि मेयर अपनी नाकामी को छुपाने के लिए विकास कार्यों को क्रियान्वयन नहीं होने का ठीकरा नगर आयुक्त के सिर फोड़ रहे हैं। उन्होंने मेयर को विकास विरोधी करार दिया है। पार्षदों ने मेयर को बर्खास्त करने की मांग की और कहा है कि नगर आयुक्त विकास के पक्षधर हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखता रहूंगा : मेयर
नगर निगम में विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अब मेयर अफजल इमाम पत्रों के माध्यम से आयुक्त पर निशाना साध रहे हैं। गुरुवार को एक बार फिर मेयर ने आयुक्त को पत्र लिख कर उपकरण खरीद में गड़बड़ी होने का अंदेशा जताया है और टेंडर डॉक्यूमेंट में संशोधन के बाद भी संशोधित चीजों नहीं शामिल किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि मेरी आपत्तियों से किसी को बुरा लगता है तो लगे। मैं महापौर के पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलता और लिखता रहूंगा। हालांकि आयुक्त मेयर द्वारा लगाए गए किसी भी आरोप पर बोलने से इंकार करते हैं। उनका कहना है कि मुझे सिर्फ काम करना है।