पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • मंदार पर्वत से समुद्र मंथन किया गया था

इस पर्वत से हुआ था समुद्र मंथन, निकला था हलाहल और 14 रत्न

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(बांका जिले में स्थित मंदार पर्वत)
भागलपुर. बिहार में ऐसे कई दार्शनिक स्थान है, जो दुनिया भर में अपने इतिहास और प्राकृतिक सौन्दर्यता के लिए मशहूर है। 11 नवंबर को 'माउंटेन डे' मनाया जा रहा है, इस मौके पर हम विशेष सीरीज 'Mountains Of India' चला रहे हैं। जिसके तहत हम आपको बिहार के बांका जिले में स्थित 'मंदार पर्वत' के बारे में बता रहे हैं।

भागलपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर बसे बांका जिले में 'मंदार पर्वत' स्थित है। 700 फीट ऊंचे इस पर्वत के बारे में पुराणों और महाभारत में कई कहानियां प्रचलित हैं। इनमें से एक कहानी ऐसी है कि देवताओं ने अमृत प्राप्ति के लिए दैत्यों के साथ मिलकर मंदार पर्वत से ही समुद्र मंथन किया था, जिसमें हलाहल विष के साथ 14 रत्न निकले थे।

वहीं एक कथा यह भी प्रचलित है कि भगवान विष्णु ने मधुकैटभ राक्षस को पराजित कर उसका वध किया और उसे यह कहकर विशाल मंदार के नीचे दबा दिया कि वह पुनः विश्व को आतंकित न करे। पुराणों के अनुसार यह लड़ाई लगभग दस हजार साल तक चली थी।

मंदार पर्वत पर स्थित है पापहरणी तालाब
मंदार पर्वत पर पापहरणी तालाब स्थित है। प्रचलित कहानियों के मुताबिक कर्नाटक के एक कुष्ठपीड़ित चोलवंशीय राजा ने मकर संक्रांति के दिन इस तालाब में स्नान किया था, जिसके बाद से उनका स्वास्थ ठीक हुआ। तभी से इसे पापहरणी के रूप में जाना जाता है। इसके पूर्व पापहरणी ‘मनोहर कुंड’ कुंड के नाम से जाना जाता था।

तालाब के बीच स्थित है लक्ष्मी -विष्णु मंदिर
पापहरणी तालाब के बीचों बीच लक्ष्मी -विष्णु मंदिर सहित है। हर मकर संक्रांति पर यहां मेले का आयोजन होता है। मेले के पहले यात्रा भी होती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।

हर वर्ष निकलती है यात्रा
मौत से पहले मधुकैटभ राक्षस ने भगवान विष्णु से यह वादा लिया था कि हर साल मकर संक्रांति के दिन वह उसे दर्शन देने मंदार आया करेंगे। कहते हैं, भगवान विष्णु ने उसे आश्वस्त किया था। यही कारण है कि हर साल मधुसूदन भगवान की प्रतिमा को बौंसी स्थित मंदिर से मंदार पर्वत तक की यात्रा कराई जाती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।

पर्वत पर अंकित हैं लकीरें
ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन में नाग को रस्सी की तरह प्रयोग किया गया था, जिसका साक्ष्य पहाड़ पर अंकित लकीरों से होता है। पर्वत पर एक समुद्र मंथन को दर्शाता हुआ स्मारक भी बनाया गया है।

आगे की स्लाइड्स में देखें मंदार पर्वत की PHOTOS....