पटना. अंतत: वही हुआ जिसे टालने की कोशिश हो रही थी। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी नहीं माने। जदयू नेतृत्व उन्हें इस्तीफा देने के लिए राजी नहीं कर पाया। नीतीश कुमार और अध्यक्ष शरद यादव से 7, कौटिल्य मार्ग में करीब दो घंटे की वार्ता के बाद भी।
वार्ता, कृिष मंत्री नरेंद्र सिंह की पहल पर हुई। नीतीश के आवास से मांझी मुख्यमंत्री आवास गए। वहां कैबिनेट की बैठक हुई। कहने को तो चार एजेंडे थे, लेकिन जिससे कैबिनेट दो खेमे में बंटी, वह था विधानसभा भंग करने का फैसला। आठ को छोड़ बाकी मंत्री विरोध में बैठक से निकल गए। कैबिनेट से मांझी ने विधानसभा भंग करने का अधिकार ले लिया।
विधानसभा एनेक्सी में विधानमंडल दल की बैठक भी पूर्व निर्धारित समय पर चार बजे शुरू हुई। बैठक को असंवैधानिक करार चुके मांझी नहीं आए। उनके समर्थक मंत्री भी गैरहाजिर रहे। बैठक में मांझी के स्थान पर नीतीश नेता चुने गए। प्रस्ताव, मांझी के करीबी विधायक अरुण मांझी ने किया। समर्थन श्रवण कुमार ने किया जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। नीतीश कुमार ने पूरे प्रकरण को भाजपा की चाल करार दिया। कहा-हम इसे कामयाब नहीं होने देंगे। फ्रंट से लीड करेंगे। सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
दिल्ली रवाना होने के पूर्व मांझी ने 15 मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। इधर, 20 मंत्रियों ने अपना इस्तीफा राजभवन को सौंप दिया। मांझी ने पार्टी विधायक दल के मुख्य सचेतक पद से भी श्रवण को हटा, राजीव रंजन को मनोनीत कर दिया है। वह दिल्ली में रणनीति बनाने में जुटे हैं। मौजूदा हालात में राजभवन रेफरी की भूमिका में है।
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