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डाउनलोड करेंपटना. स्वभाव से बेहद क्रोधी एवं स्वाभिमानी चाणक्य के जन्मभूमि को लेकर मतभेद हमेशा से रहा है, लेकिन उनकी कर्मभूमि पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) रहा है। चाणक्य को कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। एक किंवदंती के अनुसार एक बार मगध के राजा महानंद ने श्राद्ध के अवसर पर कौटिल्य को अपमानित किया था। कौटिल्य ने क्रोध के वशीभूत होकर अपनी शिखा खोलकर यह प्रतिज्ञा की थी कि जब तक वह नंदवंश का नाश नहीं कर देंगे, तब तक वह अपनी शिखा नहीं बांधेंगे। कौटिल्य के व्यावहारिक राजनीति में प्रवेश करने का यह भी एक बड़ा कारण था। नंदवंश के विनाश के बाद उसने चन्द्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठने में हर संभव सहायता की।
चाणक्य को अर्थशास्त्र का जनक भी कहा जाता है, वहीं इनकी नीतियां भी काफी लोकप्रिय रही हैं। चाणक्य ने कई ऐसी नीतियां दीं, जो आज भी बेहद लोकप्रिय हैं।
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