पटना. दवा घोटाले के आरोपी चारा घोटाले के आरोपियों जैसा हथकंडा अपनाने लगे हैं। दवा घोटाले की जांच कर गड़बड़ी उजागर करने वाले केके सिंह कमेटी के अध्यक्ष स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारी डाॅ. केके सिंह पर जानलेवा हमले का प्रयास हुआ। हालांकि सिंह बाल-बाल बच गए। घटना गुरुवार रात वैशाली के जनदाहा और समस्तीपुर के मुसरी घरारी के बीच हुई। सिंह पटना से बेगूसराय जा रहे थे और गाड़ी उनका बेटा ही चला रहा था। इस दौरान दो एसयूवी सवार हमलावरों ने सामने से सिंह की गाड़ी को जबरन रुकवा लिया। जब हमलावर उतरने लगे तभी सिंह के बेटे ने गाड़ी बैक कर भगा ली।
हमलावरों ने उनकी गाड़ी को हाइवे से नीचे गिराने की कोशिश की। बेटे ने किसी तरह से जान बचाई। अति आवश्यक काम आ जाने के कारण मुख्यालय को रिपोर्ट किए बिना रात 10:45 बजे उन्होंने पटना छोड़ा था और रात 1:45 किसी तरह बेगूसराय पहुंचे। हालांकि डॉ. सिंह ने काफी कुरेदने पर सिर्फ दुर्घटना की आशंका जताई। कहा-साढ़े तीन माह की नौकरी बची है। मैं किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता। व्यवस्था से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती।
बिहार केशरी डाॅ. श्रीकृष्ण सिंह के नाती हैं केके
केके सिंह बिहार के पहले मुख्यमंत्री और बिहार केशरी डाॅ. श्रीकृष्ण सिंह के नाती हैं। श्रीकृष्ण सिंह के बड़े भाई देवकीनंदन सिंह की पुत्री के बेटे केके सिंह ने जांच कर उजागर किया था कि दवा खरीद में 14.48 करोड़ की गड़बड़ी हुई। बीएमएसआईसीएल के एमडी और दवा खरीदने वाली टेक्निकल इवैल्यूएशन कमेटी के 8 सदस्यों को कारण बताओ नोटिस दिया गया। 3 दवा कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड किया गया। 98 दवाओं की खरीद पर रोक लगाई गई। सिंह ने विस्तृत जांच की जरूरत बताई थी, जिसके बाद स्वास्थ्य सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता में विशेष जांच कमेटी बनाई गई।
विशेष कमेटी की जांच पूरी
स्वास्थ्य सचिव आनन्द किशोर की अध्यक्षता वाली विशेष कमेटी ने जांच पूरी कर ली है। विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार ने शनिवार को इसकी समीक्षा की। फिर शाम को वे मुख्यमंत्री के साथ ब्रिटेन जाने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। हालांकि आनंद किशोर ने कहा कि 3 दिन में जांच रिपोर्ट सौंप देंगे। कमेटी ने दो दर्जन संभावित आरोपियों से पूछताछ की है। केके सिंह कमेटी के सदस्यों से भी जवाब-तलब हाेगा। दरअसल दो मोटी गर्दन बचाने के लिए दो दर्जन पतली गर्दन फंसाने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि मंत्री और प्रधान सचिव गड़बड़ी की जिम्मेवारी से कैसे बच सकते हैं। कौन छूटता है या कौन फंसता है, राजनीतिक गलियारे में इसकी चर्चा रही। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक हाेने के बाद ही इसका खुलासा होगा।
छह जगहों पर औषधि नियंत्रक की छापेमारी
शनिवार को भी स्वास्थ्य विभाग के औषधि नियंत्रकों ने राज्य के दवा दुकानों पर छापेमारी की। पटना के जीएम रोड स्थित मां वैष्णवी एजेंसी के साथ नालन्दा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुंगेर और छपरा स्थित 12 दवा एजेंसियों पर छापेमारी कर अमानक दवा और अवैध बिलों की जांच की गई। इन एजेंसियों की कुल 95 दवाओं की बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई। इनके कई कागजात जब्त किये गये। स्टेट ड्रग कंट्रोलर हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा कि रूटीन छापेमारी जारी रहेगी। इसे औैर तेज किया जाएगा।
चारा घोटाले में भी जांचकर्ता बने थे निशाना
सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर और चारा घोटाले की जांच की निगरानी कर रहे यूएन बिश्वास को पटना में रहते जान से मारने की धमकी दी गई थी।
भय फैलाने के लिए राजभवन के सामने बिश्वास के पुतले को पहले तलवार से काटा गया था, फिर उसे जलाया गया था।
धनबाद में घोटाले के गवाह की हत्या हुई थी। हालांकि साबित नहीं हो पाया कि हत्या किसने कराई।
घोटाले के समय लालू प्रसाद के निजी सचिव रहे मुकुल किशोर अब भी गायब हैं।
घोटाले के मुख्य गवाह रिटायर्ड डीएसपी वीबी द्विवेदी पर रांची में हमला।