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न्यायपालिका v/s कार्यपालिका: नगर आयुक्त को सस्पेंड कर हाईकोर्ट से टकराई सरकार

7 वर्ष पहले
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(शाम 5 बजे तक अिधसूचना नहीं जारी हुई तो वे कार में बैठकर घर के लिए जाने लगे। फोटोग्राफर ने फोटो खींचनी चाही तो उन्होंने हाथ से मुंह छुपा लिया।- फोटो)
पटना. लोकतंत्र के दो ध्रुव आमने-सामने आ गए हैं। हाईकोर्ट की रोक के बावजूद सरकार ने पटना नगर निगम के आयुक्त कुलदीप नारायण को शुक्रवार को निलंबित कर दिया। उन पर काम में कोताही और अकर्मण्यता का आरोप लगाया। दिन में मुख्यमंत्री ने इसे मंजूरी दी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा-सरकार ऐसा कैसे कर सकती है। यह तो कोर्ट से सीधा टकराव है। इस टिप्पणी के बाद भी सरकार ने शाम को निलंबन की अधिसूचना जारी कर दी। के सेंथिल कुमार के बाद कुलदीप नारायण दूसरे निगमायुक्त हैं, जिन्हें निलंबित किया गया है। हालांकि सेंथिल को भ्रष्टाचार के आरोप में सस्पेंड किया गया था।

सरकार का तर्क
नगर विकास विभाग ने 11 नवम्बर को निगमायुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर पांच बिन्दुओं पर जवाब तलब किया था। इसमें फॉगिंग मशीन न खरीदने, कचरा प्रबंधन ठीक ढंग से न करने, राजधानी में अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर रोक लगाने में असफल रहने और सफाई में कोताही बरतने का आरोप था। अपने जवाब में निगमायुक्त ने पटना नगर निगम के गतिरोध के पीछे वहां की राजनीति को दोषी ठहराया था। साथ ही राशि खर्च नहीं करने की बात स्वीकार की थी। निगमायुक्त के जवाब को असंतोषजनक करार देते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने उनको निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट में सुनवाई सोमवार को
दोपहर में निगम के वकील ने हाईकोर्ट को निलंबन की जानकारी दी। इस पर जस्टिस वीएन सिन्हा और जस्टिस पीके झा की खंडपीठ ने कहा-स्टे के बावजूद कोर्ट से बिना अनुमति लिए सरकार ऐसा कैसे कर सकती है। यह तो कोर्ट से सीधा टकराव है। कोर्ट ने वकील और अपर महाधिवक्ता राय शिवाजी नाथ से पूछा-नोटिफिकेशन कहां है। निगम के वकील ने कहा-अभी नहीं मिला है। कोर्ट ने कहा-सोमवार को पूरी तैयारी से आइए।
हाईकोर्ट ने लगाई थी तबादले पर रोक
हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और विकास जैन की खंडपीठ ने 8 जुलाई, 2013 को कुलदीप नारायण के तबादले पर रोक लगाई थी। कहा था कि बार-बार तबादले से काम पर असर पड़ रहा है। इसलिए कुलदीप नारायण को बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं हटाया जाए, ताकि काम में निरंतरता और जवाबदेही बनी रहे।
सरकार ने ये ढूंढ़ा बचाव का तरीका
आदेश में लिखा है-हाईकोर्ट के आदेश के कारण फिलहाल नगर आयुक्त के पद पर किसी की पोस्टिंग नहीं की जाएगी। प्रभार निगम में पदस्थापित वरीयतम अधिकारी को देंगे। हाईकोर्ट को निलंबन की सूचना देकर नए अधिकारी की पोस्टिंग की अनुमति ली जाएगी। निलंबन की अवधि में कुलदीप नारायण का मुख्यालय पटना नगर निगम ही होगा।
रात तक रही गहमागहमी
दोपहर 1.05 बजे
निलंबन की सूचना निगम में पहुंची।
दोपहर 2.15 बजे
हाईकोर्ट से निलंबन पर रोक लगाने की मांग। कोर्ट ने कहा-सोमवार को सुनवाई करेंगे।
शाम 6 बजे
आईएएस एसोसिएशन ने बैठक बुलाई।
शाम 7.15 बजे
आयुक्त के निलंबन की अधिसूचना जारी।
शाम 8 बजे
आईएएस एसोसिएशन मुख्यमंत्री से मिला।
रात 9.50 बजे
आयुक्त ने निलंबन की सूचना की पुष्टि की।
शीर्षत कपिल को मिल सकता है आयुक्त का प्रभार
सरकार ने आदेश में कहा है कि निगम के वरीयतम अधिकारी को प्रभार देंगे। इस लिहाज से अपर नगर आयुक्त आईएएस शीर्षत कपिल को आयुक्त का प्रभार मिल सकता है। बाकी दो अपर नगर आयुक्त प्रभु राम व सीता चौधरी बिप्रसे के हैं।
अवैध भवनों पर कार्रवाई की सजा मिली : कुलदीप
मुझे हाईकोर्ट का आदेश मानने और अवैध भवनों पर कार्रवाई की सजा मिली है। मैं पूरी जानकारी हाईकोर्ट और सरकारी अथॉरिटी को दूंगा। मेरे द्वारा पारित आदेशों से नाराज लोग मुझे और परिवार को निशाना बना सकते हैं। मुझे सुरक्षा दी जाए। मैंने डीएम को भी इस बारे में लिखा है।
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