पटना. नगर निगम कार्यालय में दोपहर एक से साढ़े पांच बजे तक अफसर, पार्षद व कर्मचारियों के चेहरों के रंग बदलते रहे। नगर आयुक्त कुलदीप नारायण के निलंबन की खबर आते ही मानो सुनामी-सी आ गई। दोपहर में चर्चा का बाजार गर्म था तो शाम पांच बजे एकदम शांत। नगर आयुक्त ने भी आनन फानन में पांच बजे मीडिया को बुला लिया। नगर आयुक्त के निलंबन के लिए होने वाले नोटिफिकेशन और नगर आयुक्त के प्रेस वार्ता पर सबकी नजर टिकी थी।
नगर आयुक्त विभाग को बेनकाब करने वाले थे। घड़ी की सूई पांच पर जाने वाली थी, तभी कुलदीप नारायण अपने चैंबर से निकल सभा कक्ष में आए। बोले- अभी तक मेरे पास कोई सूचना नहीं आई है। प्रेस वार्ता को रद्द किया जाता है। नगर आयुक्त के निलंबन की खबर सुन कोई खुश था तो काई उदास। डिप्टी मेयर के चेंबर में विपक्षी पार्षदों का जमावड़ा था। वहीं मेयर के चैंबर में मेयर समर्थक पार्षदों के चेहरे पर खुशी झलक रही थी।
मेयर ने कहा- अच्छा हुआ, डिप्टी मेयर बोले- यह काला दिन
नगर निगम को भंग करने की सिफारिश के विरोध में पार्षद नगर विकास विभाग को अपना जवाब देने पहुंचे ही थे कि नगर आयुक्त कुलदीप नारायण के निलंबन की खबर आने लगी। इसके बाद विभाग का माहौल बदल गया। विभाग में जवाब जमा कर सभी निगम कार्यालय को निकल गए। नगर आयुक्त के सस्पेंड होने पर मेयर ने कहा-अच्छा हुआ। जबकि डिप्टी मेयर ने कहा - यह काला दिन है।
कुछ पार्षदों ने कहा- एक तो हमें देर से नोटिस दिया गया और जब हमलोग यहां पहुंचे तो विशेष सचिव मौजूद नहीं हैं। जवाब देने पहुंचे पार्षदों में रूपा महतो, दीपक चौरसिया, संजय कुमार, विनय पप्पू, सुनील कुमार, बलराम चौधरी, पुष्पा सिंह, प्रमिला वर्मा, सीमा वर्मा, मीना देवी, संजय सिंह, हेमलता वर्मा, रीता राय, जीत कुमार शामिल थे।
नगर आयुक्त पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। दशहरा में बेकसूर लोगों की जान गई। बरसात में शहर में भीषण जलजमाव लगा। लोगों को काले पानी की सजा मिली। कई घरों के चिराग डेंगू से बुझ गए। जनता के हित के लिए काम कराने की बजाय पैसे की लूट हुई। उनके लिए तो निलंबन की सजा बहुत कम है। - अफजल इमाम, मेयर
नगर आयुक्त का निलंबन निगम के इतिहास में काला दिन होगा। विभाग नगर आयुक्त पर कार्रवाई कर ईमानदार अफसरों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है। -रूप नारायण मेहता, डिप्टी मेयर
(फोटो -नगर विकास विभाग में स्पष्टीकरण का लिखित जवाब लेकर पहुंचे पार्षद। वहां विशेष सचिव मौज्ूद नहीं थे। इस दौरान पार्षदों ने गुस्से का इजहार भी किया।)