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डाउनलोड करेंपटना. झारखंड के राज्यसभा सदस्य और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू ने शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। बलमुचू ने कहा-वर्ष 2000 में नीतीश ने अपनी सात दिन की सरकार बचाने के लिए कांग्रेसी विधायकों को रिश्वत की पेशकश की थी। वे पैसा, गाड़ी और बंगला सब कुछ देने को तैयार थे। लेकिन हमने प्रस्ताव ठुकरा दिया।
बलमुचू तब कांग्रेस से विधायक थे। इधर, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। कहा-राजद से कांग्रेस की नजदीकी बढ़ी तो उसके नेता ऊलजलूल आरोप लगा रहे हैं। बलमुचू ने कहा- तब अविभाजित बिहार था। केंद्र में भाजपा का शासन था। शेष पेजत्न९ पर
नीतीश कांग्रेस विधायकों...
राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने नीतीश को बिहार की बागडोर सौंपी थी। वे रेल मंत्री पद छोड़कर आए थे। अल्पमत में थे। इसलिए कांग्रेस का समर्थन चाहते थे। बलमुचू बोले-मैंने नीतीश जी से कहा था कि ऐसा करेंगे तो पार्टी हमें निकाल देगी। तो उन्होंने कहा कि आप पार्टी छोड़ दीजिए। मैंने अपने विधायकों को समझाया था कि झारखंड इलाके के करीब 30 विधायक भाजपा के हैं।
अगर हमने नीतीश कुमार का साथ दे दिया तो वह कभी भी झारखंड अलग राज्य नहीं होने देंगे। क्योंकि अलग राज्य होने से भाजपा के सभी विधायक झारखंड में आ जाएंगे और नीतीश की सरकार गिर जाएगी। बाद में ऐसा ही हुआ। नीतीश कुमार की सरकार सात दिनों में ही गिर गई और लालू की सरकार बनी। लालू से हमने अलग राज्य के लिए विधानसभा में बिल पास करा लिया था।
वर्ष 2000 में ये थी दलीय स्थिति
राजद 124
भाजपा 67
समता पार्टी 34
कांग्रेस 23
जदयू 21
झामुमो 12
बसपा 5
भाकपा 5
माकपा 2
भाकपा माले 6
अन्य 25
कुल 2324
अब तक तो प्रशंसा करते थे
अब तक कांग्रेस के नेता नीतीश कुमार की प्रशंसा करते रहते थे। आरोप पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और अमर्यादित है। इतने दिनों बाद ऐसी बेसिर-पैर की बात क्यों हो रही है?ञ्जञ्ज
वशिष्ठ नारायण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, जदयू
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