पटना. जदयू में पिछले चार दिन से जारी सत्ता संग्राम सोमवार की सुबह राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के पटना पहुंचते ही और तीखा हो गया। दिनभर राजभवन सियासी दावे-प्रतिदावे का केंद्र बना रहा। राज्यपाल ने नीतीश और मांझी दोनों कैंप की सुनी, लेकिन कोई फैसला नहीं सुनाया। वे शाम सात बजे राज्यपालों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।
राज्यपाल ने दिया भरोसा जल्द फैसला लेंगे
सम्मेलन 10 से 12 फरवरी तक है। इस दौरान गवर्नर वहीं रहेंगे। हालांकि उन्होंने शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। नीतीश ने राज्यपाल से मुलाकात कर जहां 130 विधायकों के समर्थन का दावा किया, वहीं मांझी ने भी ताल ठोकी। कहा-बहुमत मेरे पास जब कहेंगे, साबित कर दूंगा। हालांकि जदयू ने उनपर अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया। पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने मांझी को पार्टी से बाहर कर दिया। महासचिव के.सी. त्यागी ने कहा कि मांझी भाजपा के इशारे पर काम कर रहे थे।
नीतीश, शरद, लालू प्रसाद और कांग्रेस नेता सदानंद सिंह के साथ राज्यपाल से मिले। कहा- 130 विधायक परिचय पत्र के साथ आए हैं, जिनकी हम परेड करा सकते हैं। पर राज्यपाल ने कहा-अभी जरूरत नहीं है। बाद में नीतीश बोले-अगर वे 24-48 घंटे में संविधान सम्मत कार्रवाई नहीं करते हैं तो विधायक राष्ट्रपति के समक्ष परेड करेंगे। राजद, कांग्रेस व भाकपा के भी विधायकों ने राजभवन मार्च किया।
नीतीश के निकलते ही मुख्यमंत्री मांझी राज्यपाल से मिलने पहुंंचे। बहुमत होने का दावा किया। उन्होंने 19, 20 या 23 फरवरी को बहुमत साबित करने का मौका देने का अनुरोध किया। सदन में गुप्त मतदान की आवश्यकता जताई। वोटों की गिनती के समय दोनों पक्ष से एक-एक पर्यवेक्षक रखने मांग भी की।
राज्यपाल से मिलने के बाद उन्होंने बताया कि नीतीश के पास बाहुबलियों की कमी नहीं है। इसी वजह से मेरे साथ के बहुत से विधायक अभी सामने नहीं आना चाहते। अब यह राज्यपाल के ऊपर है कि वे मुझे कब मौका देना चाहते हैं। नीतीश का विधानमंडल दल के नेता के रूप में चयन अवैध है। मैंने राज्यपाल को बताया है कि मैं बहुमत साबित करने से भाग नहीं रहा हूं। जब मौका मिलेगा बहुमत साबित कर दूंगा।
चार बागियों के मामले में डबल बेंच में है रोक : स्पीकर
स्पीकर ने कहा-हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू सहित चार अन्य के मामले में सदस्यता बहाल करने संबंधी फैसले पर डबल बेंच ने रोक लगा रखी है और सुनवाई कर फैसला सुरक्षित कर रखा है। कोर्ट का फैसला आने पर वह उसका कार्यान्वयन कैसे रोक सकते हैं। विधानसभा ने ही एकल पीठ के फैसले के खिलाफ अपील की है।
बहुमत के फैसले के लिए गोपनीय मतदान क्या पहले भी हुआ है
विस में 1968 में तत्कालीन सीएम महामाया प्रसाद सिन्हा के खिलाफ बीपी मंडल ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। तत्कालीन विस अध्यक्ष धनिकलाल मंडल ने प्रस्ताव पर गोपनीय मतदान कराया था। सरकार गिर गई थी। मांझी ने गोपनीय मतदान से बहुमत का फैसला कराने की स्पीकर से मांग की है।
आगे क्या | जोड़-तोड़ और जुगाड़ की सियासत
राज्यपाल : तीन दिन दिल्ली में रहेंगे। विधि विशेषज्ञों से सलाह लेंगे। वे चाहें तो 20 को अभिभाषण के बाद ही मांझी को सदन में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं। नीतीश की मांग के अनुरूप वे 20 के पहले भी सदन की बैठक बुलाने का मांझी को निर्देश दे सकते हैं।
मांझी क्या करेंगे : 27 सदस्य जुटाने की कोशिश। भाजपा के 87 और तीन निर्दलीय साथ हैं। स्पीकर को हटाने के लिए संकल्प लाने की तैयारी है। सभा सचिव को संकल्प दिए जाने पर 14वें दिन इसपर विचार होगा। उस दिन 38 सदस्य पक्ष में होना जरूरी है। बहुमत का जुगाड़ होने पर स्पीकर हटाए जा सकते हैं। पर इसके पहले उन्हें खुद का बहुमत दिखाना होगा।
नीतीश खेमा : 130 विधायकों की एकजुटता बरकरार रखने की कोशिश। राष्ट्रपति के समक्ष इनकी परेड करा सकते हैं। मंजित सिंह ने कहा कि दो दिन में प्लेन से सभी दिल्ली जाएंगे।
राजद में टूट संभव : 8-9 विधायक बगावत कर सकते हैं। राघवेन्द्र सिंह ने कहा- हमने विधायक दल की बैठक में मांझी को हटाने पर सवाल उठाया है। सदस्यता गंवा कर भी हम सदन में मांझी का साथ देंगे।
भाजपा : मांझी यदि बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 27 विधायक जुटा लेंगे तो ही भाजपा साथ देगी। नीतीश को अवसर मिलेगा तो विरोध करेंगे। केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी बोले-राज्यपाल के निर्णय के बाद पत्ते खोलेंगे।
स्पीकर ने मांझी को असंबद्ध किया
स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने सोमवार को मांझी को जदयू से निष्कासित किए जाने के बाद असंबद्ध सदस्य घोषित कर दिया। अब सदन में सीएम के बैठने का स्थान तो नहीं बदलेगा, लेकिन जदयू सदस्य सत्ता पक्ष में कैसे बैठेंगे यह देखना रोचक होगा। मांझी इंदिरा गांधी का इतिहास दुहराएंगे। 1969 में पार्टी से निष्कासन के बाद इंदिरा पीएम बनीं रही थीं।
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