पटना. हटाए जाने से पहले कैबिनेट की बैठक बुलाकर विधानसभा भंग करवाने की कोशिश करने वाले बिहार के मुख्यमंत्री
जीतन राम मांझी ने 15 और मंत्रियों को हटाने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा है। दो दिन पहले भी उन्होंने दो मंत्रियों को हटाने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा था। बिहार का भी जिम्मा संभाल रहे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने इसे स्वीकार कर लिया है। शनिवार को मांझी को चेतावनी देते हुए जदयू नेता नीतीश कुमार ने कहा कि पार्टी के विधायकों का मत उनके साथ है। पहली बार खुल कर मांझी के विरोध में आए नीतीश ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि वे हटेंगे तो सब कुछ समेट कर हटेंगे उन्हें पता होना चाहिए कि जरूरत पड़ी तो हम विधायकों की परेड करा देंगे। मांझी को याद दिलाते हुए नीतीश ने कहा कि पार्टी ने उन्हें ही सीएम बनाने के लिए अधिकृत किया था। पटना में पार्टी की बैठक में विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद नीतीश ने अड़ियल रुख अख्तियार करने वाले मांझी को संकेत देते हुए कहा कि उनके पास लालू की पार्टी राजद और कांग्रेस का समर्थन है।
नीतीश का आरोप-पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई
शनिवार को विधायक दल की बैठक के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी के विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि जदयू को तोड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी को सीएम बनाए जाने के बाद पार्टी में गुटबंदी शुरू हो गई। मेरे पास शिकायतें आने लगीं। राज्यसभा में पार्टी के दो उम्मीदवारों के खिलाफ विरोधी पार्टियों द्वारा खड़े प्रत्याशियों का समर्थन किया गया। उन्होंने कहा कि इससे पहले ऐसी गंदी राजनीति बिहार में नहीं हुई थी। पार्टी के भीतर रहते हुए कुछ लोग राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के इलेक्शन एजेंट के रूप में नजर आए।
मांझी सरकार से जनता हो गई थी परेशान
नीतीश कुमार ने कहा कि जीतन राम मांझी को पार्टी के एजेंडे का काम आगे बढ़ाने के लिए सीएम बनाया गया था लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए। राज्य की जनता परेशान होने लगी थी और सुशासन खत्म होने लगा था। हर चीज में लोगों को परेशानी होने लगी थी। उनकी (मांझी) बयानबाजी से लोग परेशान हो गए थे। विकास का काम जो सरकार करते आ रही थी वह थम सा गया था। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव पर पार्टी के संबंध में फैसला लेने का दबाव बढ़ा। वे नेता बैठक में आने के लिए भी तैयार नहीं हुए और खुद कैबिनेट बैठक बुलाने लगे। पार्टी और विधायकों को बाइपास कर काम किया जाने लगा। पार्टी यह बर्दाश्त नहीं कर सकती।
बीजेपी पर लगाया पार्टी में फूट डालने का आरोप
जदयू नेता नीतीश ने कहा कि बिहार में बीजेपी ने पार्टी नेताओं को तोड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। नेताओं को भड़काया गया और इसी दिशा में जाकर कुछ लोगों ने पार्टी के भीतर रहते हुए पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। पार्टी की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था। ऐसे में पार्टी के नेतृत्व को फैसला लेना था और हमने फैसला लिया।
लोकसभा चुनाव बाद ही भंग कर सकता था विधानसभा
नीतीश कुमार ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी ले कर मैंने इस्तीफा दिया था, उस वक्त विधायक ऐसा करने से रोक रहे थे। पर मैं चाहता था कि मैं जनता से मुलाकात करूं और लोगों का फिर से विश्वास जीतने की कोशिश हो। लोगों ने उस वक्त ही सलाह दी थी कि विधानसभा भंग कर चुनाव कराए जाएं, लेकिन मैं नहीं चाहता था कि राज्य की जनता पर चुनाव का बोझ पड़े। चुनाव होने में डेढ़ वर्ष से ज्यादा का वक्त था इसलिए मैं पार्टी से किसी को आगे करना चाहता था।
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फोटो- शेखर