पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मांझी को दो-तीन माह ऐसे ही छोड़ देते, तो क्या हम बच पाते : नीतीश

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पटना. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मांझी को दो-तीन माह ऐसे ही राज करने के लिए छोड़ देते तो क्या हम बच पाते? मांझी जिस तरह भाजपा के एजेंडा पर चलने लगे, वह मेरे लिए सदमे से कम नहीं है। जिस पर मैंने भरोसा किया, वह कैसा निकल गया। गुरुवार को दिल्ली से पटना पहुंचने के बाद नीतीश ने कहा-मांझी के पार्टी तोड़कर भाजपा में जाने की आशंका थी। भाजपा की चाल है, मांझी से गलत काम कराओ और बदनामी का ठीकरा मेरे माथे फोड़ दो। बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्लेटफार्म तैयार हो रहा है, मैं भाजपा की चाल को नाकाम कर दूंगा।
लोकतंत्र की हत्या के प्रयास में हैं राज्यपाल : राज्यपाल और भाजपा संसदीय लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि राज्यपाल विशेष परिस्थिति में विशेष निर्णय लेंगे। लेकिन उन्होंने मांझी को लंबा समय देकर हॉर्स ट्रेडिंग का मौका दिया है।
स्पीकर को कोई छूकर देखे : स्पीकर उदय नारायण चौधरी के बचाव में उतरे नीतीश ने कहा कि हिम्मत है तो कोई स्पीकर को छूकर देखे, पता चल जाएगा। दिन भर चर्चा होती रही कि गिरफ्तार किया जाएगा। कर ले लोग स्पीकर को गिरफ्तार, समझ में आ जाएगा कानून किसे कहते हैं?
नमो पर भी निशाना : सारा खेल प्रधानमंत्री मोदी करा रहे हैं। दोनों में कैसी मुलाकात थी कि एक फोटो भी जारी नहीं हुआ। उनसे मिलने के बाद मांझी जोड़-तोड़ शुरू कर दिए हैं।
गुप्त मतदान का नियम नहीं, लॉबी डिवीजन से होगा फैसला
मांझी 20 को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद विश्वास मत हासिल करेंगे। राज्यपाल ने दो सुझाव दिए हैं। लॉबी डिवीजन हो या गुप्त मतदान। नियमों के मुताबिक गुप्त मतदान नहीं होगा। क्योंकि विधानसभा प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम 56 के तहत गुप्त मतदान का नियम नहीं है। यानी लॉबी डिवीजन से फैसला होगा। जुलाई,1997 में ऐसे ही हुआ था राबड़ी को बहुमत का फैसला।
लॉबी डिवीजन की प्रक्रिया : सदन में प्रस्ताव के पक्ष में हां और ना के निर्धारण हेतु स्पीकर सचिव को 3 मिनट विभाजन घंटी बजाने का निर्देश देंगे। फिर लॉबी से सदन में आने के प्रवेश द्वार बंद किए जाएंगे। अध्यक्ष हां और ना पक्ष वालों को सदन से सटी लॉबी में जाने का निर्देश देंगे। हर पक्ष के लिए अधिकतम दो गणक नियुक्त होंगे। ये हस्ताक्षर लेंगे। सदस्य सदन में आएंगे। फिर स्पीकर रिजल्ट की घोषणा करेंगे।
आगे की रणनीति : जदयू ने विपक्ष में बैठने की ठानी है। यानी तीन मंत्री विपक्ष में गिने जाएंगे। उनपर व्हिप लागू होगा। अनदेखी पर सदस्यता जाएगी। मांझी ने श्रवण कुमार के रहते राजीव रंजन को मुख्य सचेतक बना दिया है। हालांकि विधानसभा ने उन्हें अधिसूचित नहीं किया है। ऐसे में राजीव की व्हिप की वैधता सवालों में है।