पटना. जदयू के राज्यसभा सांसद एनके सिंह ने भी लोकसभा चुनाव लडऩे से मना कर दिया है। उन्होंने पार्टी के अल्टीमेटम के बाद अपना स्टैंड स्पष्ट कर दिया। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा-लोकसभा चुनाव लडऩे का ऑफर 22 जनवरी की शाम में मिला। यह मेरे लिए आश्चर्यजनक था। लोकसभा चुनाव के लिए छह माह से एक वर्ष का समय चाहिए। उन्हें पार्टी ने बांका से चुनाव लडऩे का प्रस्ताव दिया गया था। उधर, शिवानंद के मुद्दे पर जदयू अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें पार्टी से नहीं निकालेंगे, बर्दाश्त की हद तक बर्दाश्त करेंगे। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की।
शिवानंद तिवारी के पत्र पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह के तेवर काफी सख्त दिखे। हालांकि उन्होंने कहा कि कोशिश रहेगी कि वे साथ रहें। बर्दाश्त करने की सीमा तक बर्दाश्त करेंगे। तिवारीजी को पत्र लिखने की जरूरत नहीं थी। वे कुछ ज्यादा आक्रोश में हैं। उन्हें इंतजार करना चाहिए था। प्रदेश अध्यक्ष गुरुवार को संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उनके साथ सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी थे।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा-तिवारीजी को पत्र लिखने के पहले कुछ बातों को याद करना चाहिए था। समता पार्टी के समय पीरो से चुनाव लड़ने के लिए उनका नाम आया तो उन्होंने सरयू राय का नाम सुझाया। बात तय हो गई। कुछ दिनों बाद उन्होंने खुद ही चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। मैंने नीतीशजी से बात की, तो उन्होंने भी सहमति दे दी। यह बात तिवारीजी कैसे भूल गए? चिट्ठी लिखने के पहले उन्हें यह सब याद करना चाहिए था। हमें तो लगा कि वे इस बार भी निर्णय बदल सकते हैं। हमने तो उनके सम्मान में ही प्रस्ताव दिया था।
समर्थन वापसी की कांग्रेस को चुनौती
उन्होंने नीतीश सरकार से समर्थन वापस लेने की कांग्रेस की धमकी को स्वीकार करते हुए ऐसा करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा-कांग्रेस के समर्थन वापस लेने से नीतीश सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। कांग्रेस से उनका नीतिगत विरोध है। कांग्रेस ने तो समर्थन देने के पहले हमारी प्रशंसा की थी। विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए उसने कमेटी बनाई और फिर रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।