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डाउनलोड करेंपटना. शहर में बन रहे अवैध अपार्टमेंट्स के मामले में हाईकोर्ट ने गुरुवार को सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कहा-अफसरों की मिलीभगत से अवैध निर्माण होता है। सरकार कानून का खौफ नहीं पैदा कर पा रही है। धड़ल्ले से रिहायशी कॉलोनियों का व्यावसायिक इस्तेमाल जारी है। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है। जिम्मेदार अफसरों पर भी कार्रवाई नहीं होती। कानून का मजाक उड़ाया जाता है और राज्य सरकार एवं निगम के अधिकारी देखते रहते हैं। जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस विकास जैन की खंडपीठ ने नरेंद्र मिश्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये कड़ी टिप्पणियां कीं।
अफसरों की मिलीभगत...
नाम बताइए, घरों में दुकानें चलाने की इजाजत किसने दी
सरकार बिल्डिंग बायलॉज भी बना रही है जिनमें सभी बातों का ध्यान रखा जाएगा। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस मामले का बायलॉज से कोई लेना-देना नहीं है। पहले उन अधिकारियों का नाम बताइए जिन्होंने आवासीय कॉलोनी में व्यावसायिक गतिविधि चलाने की इजाजत दे दी। हर विभाग कानून को ताक पर रखकर अनुमति दे रहा है।
कोर्ट का आदेश भी नहीं मान रही सरकार
कोर्ट ने कहा कि एसके पुरी में अवैध निर्माण के बारे में अरुण कु मार मुखर्जी (पीआईएल) मामले में वर्ष 1995-96 में ही हाईकोर्ट ने आदेश दिया था, लेकिन पालन नहीं हुआ। नतीजा है कि हर घर में दुकानें चल रही हैं। दुकान चलाने का लाइसेंस किसने जारी किया? सेल्स टैक्स वसूली की इजाजत किसने दी? इन सभी सवालों का जवाब सरकार ने नहीं दिया। इससे अफसरों का मनोबल बढ़ रहा है।
कई लोगों ने चिट्ठी भेज शिकायत की है
कोर्ट ने कहा- आखिर कौन जिम्मेदारी तय करेगा। अगर सरकार नहीं करेगी तो हम तय कर देंगे। हाईकोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं किया जाता है। अवैध रूप से निर्मित भवनों में बिजली का कनेक्शन कैसे दे दिया जाता है? होल्डिंग टैक्स कैसे लिया जाता है? हम जानना चाहते हैं कि वे कौन अधिकारी हैं, जिन्होंने कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन कर इजाजत दी? कोर्ट ने कहा कि हमारे पास कई लोगों ने पत्र भेजकर बताया है कि निगम के किस अधिकारी की मिलीभगत से अभी भी अवैध निर्माण चल रहा है। मामले पर अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।
15 दिन में बताएं ऐसे अफसरों पर क्या कार्रवाई हुई
कोर्ट ने प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर से कहा कि वे दो हफ्ते में सरकार की ओर से हलफनामा दायर कर बताएं कि क्या योजना है। किशोर ने कहा-जो गलतियां हो चुकी हैं, उन्हें सुधारना तो आसान नहीं होगा। लेकिन आगे कानून का उल्लंघन न हो इसकी योजना बना रहे हैं। जल्दी ही राज्य सरकार उच्चस्तरीय बैठक कर निर्णय करेगी।
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