पटना. पटना एम्स में कूल्हा और घुटने का रिप्लेसमेंट होने लगा है। तीन महीने में यहां कूल्हे और घुटने का 22 रिप्लेसमेंट किया जा चुका है। इसमें 12 कूल्हे और 10 घुटने का रिप्लेसमेंट किया जा चुका है। रिप्लेसमेंट के लिए मरीजों की इतनी भीड़ हो गई है कि अगले साल जनवरी तक का कोटा फुल हो गया है। यह जानकारी ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. सुदीप कुमार ने मंगलवार को दी। उन्होंने बताया कि रिप्लेसमेंट का खर्च यहां काफी कम है।
घुटने रिप्लेसमेंट में 70 से 75 हजार, कूल्हे के लिए एक लाख 17 हजार रुपए खर्च होते हैं। यदि यही रिप्लेसमेंट प्राइवेट में या दूसरे बड़े अस्पताल में कराया जाय तो खर्च दोगुने से भी अधिक आता है। वैसे खर्च थोड़ा बहुत इंप्लांट की क्वालिटी पर भी निर्भर करता है। एम्स में जो इंप्लांट उपलब्ध कराया जाता है वह इंपोर्टेड क्वालिटी का होता है। कंपनी जिस कीमत पर देती है, उसी पर इंप्लांट मरीज को उपलब्ध करा दिया जाता है। इसलिए रिप्लेसमेंट का खर्च कम पड़ता है।
एक्सपर्ट की पूरी टीम
बाहर में हिप के लिए दो लाख से अधिक और नी रिप्लेसमेंट के लिए एक से डेढ़ लाख रुपए लिए जाते हैं। इसके अलावा अस्पताल का अन्य खर्च अलग से। पूर्णिया की एक महिला ने एक घुटने का रिप्लेसमेंट कराया उसे दो लाख रुपए खर्च करने पड़े, जबकि उसी महिला ने दूसरे घुटने का ट्रांसप्लांट पटना एम्स में कराया तो उसे महज 85 हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं। डॉ. सुदीप की माने तो को पटना एम्स में एक्सपर्ट की पूरी टीम है। हिप रिप्लेसमेंट के बाद खगौल का एक युवक अब फॉलोअप में स्कूटी चलाकर आता है। रिप्लेसमेंट के 48 घंटे के बाद मरीज को खड़ा कर दिया जाता है। डॉ. उमेश भदानी, डॉ. निशांत सहाय और डॉ. चांदनी सिन्हा मरीजों को तीन दिन तक ही पेन की दवा देते हैं।
एक और कॉकलियर इंप्लांट हुआ
पटना के एम्स में मंगलवार को एक और मरीज का कॉकलियर इंप्लांट किया गया। अबतक यहां पांच मरीजों को कॉकलियर इंप्लांट लगाया जा चुका है। पांचों ऑपरेशन सफल रहे हैं। राज्य में पहली बार एम्स में यह सुविधा बहाल हुई है। ईएनटी विभाग की हेड डॉ. कांति भावना का कहना है कि ऑपरेशन काफी जटिल होता है। इसके बाद इंप्लांट उपकरण महंगा होता है। इसलिए यह सभी मरीज नहीं लगा सकते हैं।
हालांकि पीएम फंड से आर्थिक मदद मरीज को मिलती है। इसके अलावा सरकारी कर्ज भी मिलता है। कॉकलियर इंप्लांट के लिए करीब साढ़े छह लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इंप्लांट होने पर ऐसे मरीज सुनने और बोलने लगते हैं। हालांकि इंप्लांट होने के बाद आठ से दस महीने का समय लग जाता है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को आठ साल के बच्चे का कॉकलियर इंप्लांट किया गया। इसके पहले पांच साल, 14 साल, तीन साल और 36 साल के मरीज के कॉकलियर इंप्लांट का ऑपरेशन किया जा चुका है।
इसी माह से 3 मॉड्यूलर ओटी की सुविधा
पटना एम्स में तीन मॉड्यूलर ओटी तैयार है। संभावना है कि इनकी सुविधा इसी महीने से मिलने लगे। संस्थान के निदेशक डॉ. गिरीश कुमार सिंह के मुताबिक तीन मॉड्यूलर ओटी के शुरू हो जाने से सभी तरह के आपरेशन होने लगेंगे। डॉ. सिंह ने बताया कि 10 से 15 दिन में सभी मॉड्यूलर ओटी कार्यरत हो जाएंगे।
क्या 25 दिसंबर को हो पाएगा उद्घाटन ?
पटना एम्स का उद्घाटन क्या 25 दिसंबर को हो पाएगा? इस पर संशय है। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन जब पटना एम्स आए थे, तो उन्होंने कहा था कि उद्घाटन अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को किया जाएगा। उसी तरह से काम पूरा करने का निर्देश दिया था। पर फिलहाल जो स्थिति है, उससे नहीं लगता है कि पटना एम्स का उद्घाटन 25 दिसंबर को हो पाएगा। इसकी पुष्टि निदेशक डॉ. गिरीश कुमार सिंह भी करते हैं। सूत्रों की माने तो अभी कई महत्वपूर्ण काम बाकी है।