पटना. चंद सिक्कों में बिकता है इनसान का जमीर यहां... आखिर किसकी जमीर के बिकने की बात कर रहे हैं कुलदीप नारायण..। यूं तो यह
फेसबुक पोस्ट है, जिसे पूर्व नगर आयुक्त कुलदीप नारायण ने कुछ दिन पहले पोस्ट किया था। लेकिन, रविवार को इसे फिर शेयर कर दो दिन बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कुलदीप ने कहीं दूर तक निशाना लगाया है। इन चंद सिक्कों की खनक में जमीर का बिकना.. दूर तक संकेत करता है, वह भी उस समय जब कुलदीप नारायण निलंबित हैं।
फेसबुक पर जिस पोस्ट को शेयर किया है उसमें लिखा है- चंद सिक्कों में बिकता है इनसान का जमीर यहां, कौन कहता है मेरे मुल्क में महंगाई बहुत है। कुलदीप ने आज यह पोस्ट दोबारा क्यों शेयर किया है यह तो उनका दिल ही जानता है, लेकिन इस पोस्ट ने हालिया घटनाक्रम के पीछे सरकार व विभाग की मंशा को जाहिर किया है।
कमेंट्स में भी इशारे दूर तक
कुलदीप नारायण के इस पोस्ट पर उनके चाहने वालों ने जिस तरह की टिप्पणियां की हैं, उसके भी दूर तक इशारे हैं। एक उदाहरण देखिए.. फेसबुक फ्रेंड हर्षद पटेल लिखते हैं- निराश मत हो, आपका काम राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित होता रहा है। यह परीक्षा की घड़ी है। वहीं, सुमित सेठ लिखते हैं- बहुत महंगा पड़ेगा...उन्हें यह सस्तापन। एक और पोस्ट है कौशल का- सर, आप भी एकदम सारे बिल्डर के पीछे पड़ गए थे..आपके चलते कितने बिल्डर भीख मांग रहे हैं...।
कुलदीपर नारायण ने वाट्सएप पर फरमाया है.... हवाओं से कह दो अपनी औकात में रहें,हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं। कुलदीप का इशारा कहीं न कहीं उनके दिल की इस बात को जाहिर करता है कि जो ईमानदारी और सही रास्ते पर है, उसे भ्रष्ट सिस्टम मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकता। रात 8.48 बजे फिर एक कविता पोस्ट की... दिलों में तुम अपनी बेताबियां ले के चल रहे हो, तो जिंदा हो तुम.... नजर में ख्चाबों की बिजलियां ले के चल रहे हो, तो जिंदा हो तुम