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डाउनलोड करेंपटना. जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से बुधवार को पहले ही दिन पीएमसीएच की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई। मंगलवार की रात 12 बजे से बुधवार को दोपहर दो बजे तक 12 मरीजों की मौत हो गई। 32 ऑपरेशन टल गए। हालांकि रोजाना की तरह ओपीडी चले और आपरेशन भी हुए। पर मरीजों की संख्या काफी कम थी।
ओपीडी में प्रतिदिन 2500-3000 मरीज रजिस्ट्रेशन कराते हैं। लेकिन, बुधवार को 1440 ने ही रजिस्ट्रेशन कराया। सेंट्रल इमरजेंसी में 124, गाइनी इमरजेंसी 12 और शिशु रोग की इमरजेंसी में 27 मरीज आए। सामान्य तौर पर इमरजेंसी में 300 से अधिक मरीज आते हैं। लेकिन, इनमें भी मरीजों की संख्या कम रही।
अधीक्षक डॉ. अमरकांत झा अमर और उपाधीक्षक डॉ. विमल कारक ने कहा कि हड़ताल होने पर मरीजों की संख्या कम हो जाती है। 12 मौतों के सवाल पर डॉ.कारक के कहा कि यहां काफी गंभीर स्थिति में मरीज आते हैं। इलाज की पूरी व्यवस्था रखी गई थी। ऐसा नहीं है कि इलाज नहीं हुआ और मौत हो गई।
दस की जगह तीन
एनेस्थेटिस्ट डॉ. बीके कश्यप के मुताबिक, सभी ओटी में आपरेशन हुए। पर मरीजो ंकी संख्या कम थी। जहां दस आपरेशन होते थे, वहां कहीं दो तो कहीं तीन हुए।
डॉक्टरों का इंतजार
इमरजेंसी में सुबह में तो स्थिति कुछ हद तक रही। पर दोपहर एक बजे के बाद मरीज के परिजन असहाय दिख रहे थे। सभी डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। इमरजेंसी खाली-सी थी।
सीनियर लगा रहे थे राउंड
कुछ सीनियर डॉक्टर राउंड करते दिखे। अस्पताल प्रशासन ने सिविल सर्जन से 50 डॉक्टरों की मांग की थी। इसमें करीब 25 डॉक्टर बुधवार की शाम तक पहुंच गए थे।
सीजेरियन ऑपरेशन हुए
मंगलवार रात 12 बजे से सुबह सात बजे तक तीन आपरेशन हुए। 10 नार्मल डिलेवरी भी हुई। नर्सें तैनात थीं। दो डॉक्टर बाहर से भी आ गई थीं।
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