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सम्राट को याद तो नहीं... कुलदीप नारायण ने शकुनी चौधरी को कठघरे में खड़ा किया था

7 वर्ष पहले
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पटना. निलंबित नगर आयुक्त कुलदीप नारायण दो साल पहले मुंगेर के डीएम थे। उन्होंने सरकारी जमीन बेचने के मामले में प्रदेश के बड़े नेता शकुनी चौधरी को कठघरे में खड़ा कर दिया था। बिक्री रद्द भी कर दी थी। शकुनी, नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी के पिता हैं। इस पुराने मामले का नया संदर्भ यह है कि नगर विकास विभाग की सिफारिश पर ही नारायण को निलंबित किया गया है। यह पुराना मामला इस चर्चा के साथ उभरा है कि अभी की तल्खी में इसकी भी भूमिका है क्या?

राज्य सरकार ने 1971-72 के दौरान शकुनी चौधरी को असरगंज (मुंगेर) में 1.4 एकड़ जमीन दी। यह उनको पूर्व सैनिक के नाते खेती करने को मिली। ऐसा नियम है। लेकिन, इसमें शर्त है कि उपयोग करने वाला इसे बेचेगा नहीं। यह उसके उत्तराधिकारी को जरूर स्थानांतरित हो सकता है। लेकिन शकुनी चौधरी ने इसे सच्चिदानंद सिंह को बेच दी। यह सबकुछ दिलचस्प तरीके से सामने आया। जब प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में यह जमीन जाने लगी, तो सच्चिदानंद सिंह मुआवजे के लिए पटना हाईकोर्ट पहुंचे।
कोर्ट ने मामले को निपटाने का जिम्मा मुंगेर के डीएम को दिया। कुलदीप नारायण डीएम थे। जांच में सब पकड़ा गया। चौधरी की बदनामी हुई। डीएम के आदेश पर एडीएम ने कार्रवाई की। जमाबंदी रद्द हुई। 23 नवंबर, 2012 के डीएम के आदेश में दर्ज है- "गैरमजरूआ जमीन की निजी व्यक्ति को बंदोबस्ती अवैध है। दाखिल-खारिज करने वाले अंचलाधिकारी पर कार्रवाई हो। सीओ इस मामले में एलआरडीसी के यहां अपील करेंगे। सरकारी खर्चे पर इसका निपटारा कराएंगे।'
"अगर ऐसा कुछ हुआ भी है, तो इससे मौजूदा मसले का क्या ताल्लुक है? इन दोनों मामलों में कोई लेना-देना हो भी सकता है क्या? हम क्या, सभी कहते रहे हैं कि पटना कूड़े की ढेर पर है। नरक-सी स्थिति है। पिछली बरसात में शहर के कई इलाके डूब गए। सरकार का काम पैसा देना है। हम देते भी रहे हैं। आखिर दूसरे (पटना नगर निगम) की गलती के चलते सरकार क्यों फजीहत झेलती रहे? … हमने पटना शहर के नारकीय हालात, बुनियादी नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता में नगर निगम के फेल रहने, दिए गए रुपए खर्च न होने, निगम की घोर अशांति, इसे सिर्फ कुछ लोगों का अखाड़ा बने रहने आदि मुद्दों पर नगर आयुक्त से जवाब मांगा था।
उनके जवाब से असंतुष्ट होने के बाद सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है। हमने इस क्रम में पटना हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान किया है। हम कोर्ट के आदेश पर ही नए नगर आयुक्त को तैनात करेंगे। ऐसे में भला दो साल पुराने इस मामले (जमीन का मसला) की क्या प्रासंगिकता है? अव्वल तो मैं इसके बारे में बहुत जानता भी नहीं हूं।' -सम्राट चौधरी, नगर विकास मंत्री (बिहार)