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डाउनलोड करेंपटना. नगर आयुक्त, बहुत दुख के साथ लिखना पड़ रहा है कि कल दिनांक 27.01.2014 को निगम बोर्ड की बैठक थी, उसमें माननीय पार्षदों द्वारा बहुत जोरदार तरीके से विरोध किया गया, जिसके कारण अधोहस्ताक्षरी की बैठक स्थगित करनी पड़ी। आप स्वयं कल की बैठक में उपस्थित थे। माननीय पार्षदों का जिस बिंदु पर सबसे ज्यादा विरोध था, वह जनहित में लिए गए विकास योजनाओं के अंतर्गत कार्य लंबित रहने के कारण 10 लाख रुपए की जन योजना, जो लगभग छह माह पूर्व सशक्त स्थायी समिति एवं निगम बोर्ड से स्वीकृत हुई है।
इस मद में राज्य सरकार द्वारा भेजी गई पूरी राशि भी उपलब्ध है। उसके बाद वर्षों से चल रहीं जनहितके लिए 15 लाख रुपए की योजना जो अभी तक वार्डों में लंबित है, जिससे प्रतिदिन आम लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पहले इस योजना में राशि कमी के कारण कार्य को क्रियान्वयन कराने में दिक्कत आ रही थी, लेकिन अद्योस्ताक्षरी के द्वारा विभाग से आग्रह करके हाल के दिनों में इस मद में राशि की अनुमति ले ली गई है।
उसके बाद इन सभी योजनाओं को लंबित रखना या विलंब करना ही माननीय पार्षदों द्वारा बैठक में विरोध का मुख्य कारण बना। नगर आयुक्त आपको अच्छी तरह ज्ञात है कि सशक्त स्थायी समिति और निगम बोर्ड से कई ऐसे प्रस्ताव पारित हैं, जिनका क्रियान्वयन नहीं होने के कारण लोगों को गंभीर समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है।
दो गुटों में बंटे पार्षद
पटना नगर निगम के पार्षद दो गुटों में बंट गए हैं। पार्षदों का एक दल सोमवार को हंगामे के बाद स्थगित बैठक को अविलंब फिर से बुलाने की मांग कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर पार्षदों का एक दल कह रहा है कि दो एजेंडे महत्वपूर्ण होने के साथ पहले पारित प्रस्तावित भी महत्वपूर्ण हैं।
वार्ड नंबर 67 के पार्षद मनोज कुमार के नेतृत्व में 31 पार्षदों ने संयुक्त हस्ताक्षर कर 30 जनवरी को मौर्यालोक स्थित निगम कार्यालय में धरना प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है तो वहीं वार्ड संख्या 28 के पार्षद विनय कुमार पप्पू के नेतृत्व में 12 पार्षदों ने हस्ताक्षर कर फिर से बैठक बुलाने की मांग नगर निगम सचिव से किया है। विनय कुमार पप्पू ने कहा है कि अगर इस पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो पार्षदों द्वारा खुद ही बैठक कर कार्रवाई करने को बाध्य होना पड़ेगा।
जो योजनाएं अनुपालन के इंतजार में हैं...
51 पार्किंग स्थलों की व्यवस्था करना।
पेयजल और प्याऊ की व्यवस्था।
यूरिनल बनाना।
जर्जर शौचालय का जीर्णोधार।
डोर टू डोर कचरे का उठाव।
मैनहॉल, कैचपिट की मरम्मत।
वार्डों के विकास के लिए 10-15 लाख की योजना अटकी।
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