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डाउनलोड करेंपटना. पटना विश्वविद्यालय में अब तक सीनेट की बैठक नहीं हो सकी है। जबकि दिसंबर-जनवरी में हो जानी चाहिए थी। अगर बैठक जल्द नहीं हुई तो कई मामले अटक सकते हैं। विश्वविद्यालय में किसी नए कोर्स की शुरुआत के साथ नए भवन बनाने, पुराने भवनों के जीर्णोद्धार संबंधी कार्यों के लिए सीनेट की बैठक जरूरी है। इस वित्तीय वर्ष में यह बैठक आयोजित करने की कोई योजना नहीं दिख रही। विश्वविद्यालय में परीक्षाएं 24 फरवरी से शुरू हो रही हैं। उसके बाद सीनेट की बैठक करने में मुश्किल होगी। अभी विवि प्रशासन कन्वोकेशन आयोजित करने में ही व्यस्त है।
बजट बनना भी शुरू नहीं
पटना विश्वविद्यालय का बजट सीनेट में ही पास होता है। इसके आधार पर राज्य सरकार अनुदान देती है। लेकिन विवि प्रशासन ने अभी तक वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए बजट तैयार करने की शुरुआत भी नहीं की है। अभी पीयू में फाइनेंशियल एडवाइजर व फाइनेंस ऑफिसर, दोनों पद खाली हैं। बजट ऑफिसर गणेश्वर प्रधान ने बताया कि अभी तक बजट की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
नए कोर्स शुरू होने के भी आसार नहीं
कॉलेजों व पीजी विभागों में अगले सत्र में कोई भी नया कोर्स शुरू नहीं हो सकेगा, क्योंकि सीनेट से पास होने के बाद कोर्स का एप्रूवल राजभवन द्वारा किया जाता है। राजभवन द्वारा एप्रूवल होने में भी वक्त लगता है। जबकि सभी कोर्स में नामांकन की प्रक्रिया मई में शुरू हो जाती है।
परीक्षा की तैयारी शुरू
कॉलेजों में परीक्षा और वर्तमान सत्र की विदाई की तैयारी शुरू हो गई है। लेकिन पटना विवि प्रशासन न सत्र की विदाई के प्रति गंभीर है और न ही आने वाले सत्र की अच्छी शुरुआत के प्रति। नए सत्र की तैयारियों के नाम पर विवि प्रशासन सिर्फ परीक्षाएं वक्तपर कराने की कोशिश में है।
बैठक होगी
अभी हम कन्वोकेशन की तैयारी में लगे हैं। सीनेट की बैठक भी आयोजित होगी। हालांकि अभी तारीख तय नहीं है। फरवरी में पूरा करने की कोशिश करेंगे
प्रो. बलराम तिवारी, रजिस्ट्रार, पटना विवि
जनवरी तक हो जानी चाहिए सीनेट की बैठक
हर विश्वविद्यालय में सीनेट की बैठक जनवरी तक हो जानी चाहिए। इसमें साल भर के लेखा-जोखा पर चर्चा होती है। साल भर के विवि प्रशासन के काम की समीक्षा भी सीनेट सदस्य करते हैं।
सीनेट से पहले एकेडमिक काउंसिल, फाइनेंस कमेटी व सिंडिकेट की बैठक होती है। इन तीनों बैठकों में विवि के सीनेट के प्रस्ताव पर चर्चा होती है। इसके बाद सीनेट सदस्यों को लेटर भेज कर आमंत्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग एक महीने का वक्तलगता है।
बैठक नहीं होने से नुकसान
पीयू का बजट पास नहीं हो सकेगा। सरकार उसके मुताबिक अनुदान नहीं दे सकेगी। इससे शिक्षकों-कर्मियों का वेतन देना भी मुश्किल होगा।
विश्वविद्यालय में नए सत्र में नए कोर्स की शुरुआत नहीं हो सकेगी।
विश्वविद्यालय के कामकाज की समीक्षा भी नहीं होगी। इससे गलतियां पब्लिक फोरम में नहीं आएंगी।
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