पटना। बिहार की 40 हजार दवा दुकानों के शटर कल नहीं उठेंगे। ऐसा केंद्र सरकार के कुछ फैसलों के विरोध में होगा। पूरे देश में दवा दुकानें बंद रहेंगी। राष्ट्रीय स्तर पर हर दिन दवा का कारोबार करीब 200 करोड़ रुपये का होता है जबकि बिहार में हर दिन नौ करोड़ की दवाएं बाजार से निकलती हैं। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी दुकानें बंद रहेंगी। सरकार ने फैसला किया है कि फर्मास्यूट्स ही दवा की दुकानों पर काम करेंगे। दूसरा, दवा की गुणवत्ता में गड़बड़ी पाये जाने पर तत्कान दुकानदार पर प्राथमिकी दर्ज होगी और तीसरा कमीशन में इजाफे का मसला है। बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह ने कहा कि बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित उत्तर-पूर्व के और कई राज्यों में फर्मास्यूट्स की भारी कमी है। इस कमी को रातों-रात दूर करना संभव नहीं है। एसोसिएशन चाहता है कि तीन साल से ज्यादा समय से काम करने वाले दवा दुकानदारों को इसकी ट्रेनिंग दे दी जाये।
परसन कुमार सिंह ने कहा कि इसी प्रकार दूसरे फैसले भी हमारे कारोबार को प्रभावित करने वाले हैं। हमारा कहना है कि दवा की गुणवत्ता में कमी पायी जाती है तो मुकदमा संबंधित दवा कंपनियों पर की जाये। इसमें भला दवा दुकानदार की क्या भूमिका हो सकती है। हम तो ऐसे काम के सख्त खिलाफ हैं। हम चाहते हैं कि ऐसे मामले पकड़े जायें तो दुकानदारों को गवाह बनाया जाये न कि उन पर ही केस कर दिया जाये। उन्होंने कहा कि फर्मास्यूट्स वाला मामला लागू होने पर ड्रग इंस्पेक्टर की मनमानी और बढ़ जाएगी।