रेल किराए में वृद्धि के खिलाफ कुछ यूं हुआ विरोध

9 वर्ष पहले
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पटना। रेल किराए में वृद्धि का कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने विरोध किया है। यूपीए समर्थक दल और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद की पार्टी राजद ने यात्री किराए में बढ़ोतरी को गैर जरूरी कदम करार दिया है। हालांकि, लालू खुद इस मसले पर सामने नहीं आए। वहीं, वाम संगठन एआईएसएफ ने किराए में बढ़ोतरी के खिलाफ पटना जंक्शन गोलंबर पर स्थापित रेल इंजन के सामने जोरदार प्रदर्शन किया और रेल मंत्री पवन कुमार बंसल का पुतला दहन किया।
इस मौके पर एआईएसएफ के राज्य सचिव
मंडल सदस्य सुशील कुमार ने बताया कि कांग्रेस पार्टी का हाथ आम आदमी के लिए हमेशा घातक सिद्ध होता है। पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस के दाम बढ़ाने के बाद कांग्रेस नीत यूपीए सरकार एफडीआई लेकर आई। अब रेल किराए में वृद्धि कर आम आदमी पर बोझ बढ़ा रही है।
माल ढुलाई से हो भरपाई : राजद
राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने रेल किराए में बढ़ोतरी के बगैर रेलवे की आमदनी बढ़ाने के लालू फार्मूले को अपनाने की जरूरत बताते हुए कहा कि रेल से माल ढुलाई को प्रोत्साहित कर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि यात्री किराए में बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है।
रेल किराए की खबर का अतिरिक्त अंश:
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने रेल किराए में वृद्धि की आलोचना करते हुए कहा कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की समस्याएं बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के दाम में पिछले एक साल के अंदर कई बार वृद्धि से देश की गरीब जनता पहले से ही प्रताड़ित है।
गरीबों को भी नहीं बख्शा
भाकपा ने रेल भाड़े में वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। राज्य सचिव राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने हर श्रेणी के यात्रियों का किराया बढ़ाकर महंगाई की मार झेल रही जनता की जिंदगी भारी कर दी है।
किराया बढ़ाना असामयिक
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष केपीएस केशरी ने यात्री किराया में की गई बढ़ोतरी असामयिक है। बढ़ोतरी संसद के बजट सत्र में किया जाना चाहिए था। इसका भार महंगाई के बोझ तले दबी आम जनता पर पड़ेगा। एक माह पहले भाड़ा बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।