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  • अपनी सरकार बचाने के लिए जीतन राम मांझी को 117 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

आज राज्यपाल करेंगे बिहार की सीयासत का फैसला, यह है सदन का गणित

6 वर्ष पहले
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पटना. बिहार में तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम बदल रहा है। जेडीयू नेता नीतीश कुमार की अगुआई में सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद अब निगाहें बिहार के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी पर टिक गई हैं।
गवर्नर के लिए मांझी को हटाना आसान नहीं
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि राज्यपाल के लिए मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को हटाना आसान नहीं है। कश्यप का कहना है कि बहुमत सिर्फ विधानसभा में साबित हो सकता है। यह सदन के बाहर राजभवन जैसी जगहों पर साबित नहीं किया जा सकता है।
गवर्नर के सामने मुख्य रूप से दो विकल्प-
पहला-नीतीश को न्योता देने से पहले मांझी को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं।
दूसरा-मांझी से उनका समर्थन कर रहे विधायकों के दस्तखत वाली चिट्ठी मांग सकते हैं या राजभवन में विधायकों की परेड करवाने को कह सकते हैं। अगर मांझी ऐसा नहीं कर पाते हैं तो गवर्नर नीतीश को सरकार बनाने का न्योता देकर उनसे विधानसभा में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं।

विधानसभा भंग करना भी मुश्किल
बिहार के सीएम जीतन राम मांझी इस्‍तीफा दे सकते हैं या गर्वनर से सदन भंग करने की मांग कर सकते हैं। चूंकि, मांझी ने कैबिनेट के कवल सात मंत्रियों की सहमति से विधानसभा भंग करने का प्रस्‍ताव पारित कराया है, इसलिए गवर्नर इस प्रस्‍ताव को सीधे मानने की बजाय सीएम से अपनी सिफारिश पर फिर से गौर करने और सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं। गवर्नर के लिए विधानसभा भंग करना इसलिए भी मुश्किल हो गया है क्योंकि नीतीश ने अपना समर्थन कर रहे 130 विधायकों की परेड करवा दी है।
क्या गर्वनर राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं?
यह गर्वनर पर है कि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश केंद्र से करते हैं या नहीं। लेकिन उन्हें यह भी ध्यान में रखना होगा कि नीतीश कुमार पहले ही यह दावा कर चुके हैं कि उनके पास सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल है। गर्वनर के सामने यह सवाल भी होगा कि बजट सत्र करीब ही है ऐसे में अगर राष्ट्रपति शासन लगता है तो राज्य का बजट संसद से पास करवाना होगा। राज्य में विधानसभा चुनाव होने में अभी भी 8 महीने बाकी हैं ऐसे में राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने से बचना चाहेंगे।
क्या होगा अगर बीजेपी की मदद से मांझी 117 के आंकड़े तक पहुंच जाते हैं?
गवर्नर दलबदल विरोधी कानून के तहत यह देख सकते हैं कि क्या मांझी के पास नई पार्टी बनाने के लिए अपनी पार्टी के दो तिहाई सदस्यों का समर्थन है या नहीं। जेडीयू के 111 विधायकों में से नीतीश को 97 विधायकों का समर्थन प्राप्त है जबकि मांझी को सिर्फ 14 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
आगे की स्लाइड में देखिए, बिहार के राजनीतिक हालात पर ग्राफिक: