पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री
सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि धान खरीद में राज्य सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है। धान की फसल तैयार हुए एक महीना हो गया मगर आजतक एक भी क्रय केन्द्र नहीं खुला है।
इससे जरूरतमंद किसान बिचैलियों से औने-पौने दाम पर अपना धान बेचने के लिए विवश है। धान खरीद और उस पर बोनस मद में राज्य खाद्य निगम और पैक्सों को अभी तक एक पैसा भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
प्रतिवर्ष 15 नवम्बर से होने वाली धान की खरीद को इस साल 10 दिन विलम्ब से 25 नवम्बर से करने की घोषणा की गई, फिर मुख्यमंत्री ने इसे बढ़ा कर 05 दिसम्बर कर दिया। मगर आधा दिसम्बर बीतने को है, पूरे राज्य में एक भी क्रय केन्द्र नहीं खोला गया।
राज्य खाद्य निगम और पैक्सों की क्रय केन्द्र खोलने की कहीं कोई तैयारी भी नहीं दिख रही है। नतीजतन अब तक एक छटांक धान की खरीद सरकार नहीं कर पाई है। किसान ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
सरकार ने वाहवाही लुटने के लिए धान की खरीद पर 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा तो कर दी है, मगर पिछले वर्ष निगम और पैक्सों को दिए गए बोनस के मद में 300 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिलने के कारण इस वर्ष बोनस मद का 900 करोड़ रुपया व खरीद के लिए भी एक पैसा अब तक जारी नहीं किया गया है।
पहले 24 घंटे के अंदर भुगतान का प्रावधान था। मगर इस साल नई व्यवस्था में किसानों को अपना भुगतान प्राप्त करने में महीना लग जाएगा। रबी बुआई का मौसम चल रहा है। खाद, बीज और अपनी अन्य जरूरतों के कारण विवश होकर किसानों को बिचैलियों के हाथों औने-पौने दाम पर अपना धान बेचना पड़ रहा है।
आमतौर पर जरूरतमंद किसानों को प्रति क्विंटल धान की कीमत 1000 से 1100 रुपये ही मिल पा रही है। सरकार की नाकामी की वजह से किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।