पटना। साहब का बेहद खास है मुंशी मियां। अपराधियों ने उसे गोली मार दी। अगले दिन आठ बजते-बजते सेंटर से सभी अखबार न सिर्फ बिक गये बल्कि उनका सर्कुलेशन भी बढ़ गया। साहब का जलवा यहां ऐसा ही है। बीते करीब 25 साल से ऐसा ही हो रहा है। साहब से जुड़ी कोई खबर हो तो लोग उसे अखबारों से पढऩा चाहते हैं। वे बात करने के बदले चुपचाप खबरों को पढ़ लेते हैं। यह साहब का क्रेज है या टेरर? मुंशी पर हमला आठ मई को हुआ था। बात हो रही है बिहार के डॉन और आतंक के पर्याय रहे मोहम्मद शहाबुद्दीन की। कम से कम सीवान में उन्हें लोग नाम लेकर नहीं पुकारते। जेल में बंद होने बावजूद उनका खौफ लोगों पर तारी है और उनकी पहचान साहब की बनी हुई है।
10 मई को अपनी उम्र का 46 वां साल पूरा करने वाले शहाबुद्दीन पर उम्र से भी ज्यादा 56 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से 6 में उन्हें सजा हो चुकी है। भाकपा माले के कार्यकर्ता छोटेलाल गुप्ता के अपहरण व हत्या के मामले में वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। सीवान के तत्कालीन एसपी एसके सिंघल के साथ गोलीबारी करने की घटना और पाकिस्तान निर्मित गोली मिलने के मामले में उन्हें दस-दस साल की सजाएं हो चुकी हैं। 27 मामलों में ट्रायल चल रहा है। सीवान जेल के अंदर उन मुकदमों की सुनवायी होती है क्योंकि जेल से कोर्ट ले जाना कई वजहों से ठीक नहीं माना गया।
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